Thursday, May 1, 2008

घर की याद


शायद ही कोई ऐसा हो जिसको ना आती हो ... घर की याद
चंद दिनों बाद में घर जा रहा हूँ.

मेरे लिए ... अब दुनिया कितनी बड़ी हो गई है ...
... कहाँ तो बचपन में 25 किलो मीटर दूर का पता नहीं था
अब मैं हजार किलो मीटर से ज्यादा दूरी पर रह रहा हूँ ...
मुझको अब ... हजारों- हजार मील की दुनिया भी पता है ...

दिल्ली से भोपाल ... भोपाल से नागपुर ...
नागपुर से तन्सरामल ( उमरानाला ) ...
नागपुर में दोस्तों से मुलाकात ...उसके बाद घर ...

4 comments:

Udan Tashtari said...

चलिये, बढ़िया है. हो आईये घर. मन बहल जायेगा.

अमिताभ फौजदार said...

गाँव की माटी की खुशबू लाना ...उमरानाला की माटी को मेरा नमन .... दीवाने शाह बाबा की दरगाह पे मेरा कोटिशः नमन ......

राज भाटिय़ा said...

दोस्तो से मिल कर , ओर घर से लोट कर सभी यादे हम मे भी बांटना, धन्यवाद, मेने लेट पढी आप की यह पोस्ट वर्ना शुभ यात्रा जरुर बोलता.

राज भाटिय़ा said...

दोस्तो से मिल कर , ओर घर से लोट कर सभी यादे हम मे भी बांटना, धन्यवाद, मेने लेट पढी आप की यह पोस्ट वर्ना शुभ यात्रा जरुर बोलता.