Tuesday, May 27, 2008

नहीं रहे मयाराम काका

नाटकों में दमदार रोल करने वाले मयाराम काका नहीं रहे ...
भाऊ की तरह ही चल बसे दूध डेहरी वाले मयाराम काका


सोमवार को छोटे भाई (रामधन) से मोबाइल पे बात हुई ...
बता रहा था कि भाऊ की तरह ही दूध डेहरी वाले मयाराम काका भी चल बसे ...
भाऊ यानी हमारे पिताजी। मतलब मयाराम काका का रविवार 25 मई को निधन हो गया .

मुझे पिताजी का अचानक चले जाना बरबस याद हो आया ...
तारीख थी 2006 के नवम्बर महीने की 15 ।मैं दो- एक दिन पहले ही दिल्ली से भोपाल लौटा था ...
मेरे मोबाइल पर फोन आया कि जल्दी घर आ जाओ भाऊ सीरियस है ...
बाद में सब कुछ साफ हो गया ...पापा को अटैक आया था ...मैं दूसरे दिन घर पंहुचा था ...

पूरे गाँव में कई दिनों तक चर्चा होती रही कि फंला आदमी कैसे अचानक चल बसे ...
गांवों - देहातों में किसी को हाट अटैक आना कुछ समय पहले तक सुनाई नहीं देता थामगर अब अक्सर अटैक आने की खबर सुनने को मिल जाती है...

इस बार भी मयाराम काका के चल बसने की बात पर मुझे विश्वास ही नहीं हो रहा है ...
मयाराम काका नाटकों में यादगार काम करते थे ...बचपन में कई नाटक रात -रात भर जागकर देखे थे ... परिवार के साथ अपने गाँव में नाटक देखने जाते थे ...मयाराम काका का हरेक नाटक में दमदार रोल होता था ... उनकी आवाज दूर -दूर तक गूंजती थी ...

मयाराम काका हमेशा राजा का रोल करते थे ... द्रोपदी चीर हरण , भरत -मिलाप जैसे कई नाटकों वे हमेशा लीड रोल करते थे ... वैसे एक इन्सान के रूप भी मुझे हमेशा याद आते रहेगें ...
पड़ोसियों के बीच विवाद होना कोई नई बात होती ॥ मगर उनका स्वभाव इतना अच्छा था कि कभी किसी से कोई विवाद या झगड़ा रहा हो ऐसा मुझे याद नहीं आता ...उनके परिवार में पत्नी और चार बच्चे है ...

गांवों में जल्दी ना पता चल पाने बीमारी - हाट अटैक ने मयाराम काका की भी जान ले ली ।

आख़िर हाट अटैक का पता क्यों नहीं चल पाताकैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी के ताजा शोध में पता चला है की 50 फीसदी लोगों को मालूम ही नहीं हो पाता है कि उन्हें हाट अटैक जैसी गंभीर बीमारी है ...

इस शोध में यह भी खुलासा किया गया है कि ...दिल के अगल -बगल में दर्द या दूसरी अन्य बीमारियों का वे समझ ना पाने के कारण इलाज नहीं करा पाते ...

मयाराम काका और पिताजी के प्रति सच्ची श्रदांजलि यह होगी कि
गाँव के लोग हाट अटैक के बारे सचेत हो जाए .

Friday, May 23, 2008

आरुषि हत्याकांड


नोएडा [वरिष्ठ संवाददाता]। बहुचर्चित आरुषि हत्याकांड में शुक्रवार को उत्तर प्रदेश की पुलिस ने अहम खुलासा करते हुए बताया कि इस हत्याकांड में आरुषि के पिता डा। राजेश तलवार ही मुख्य आरोपी है और उसने ही इस डबल मर्डर [आरुषि व घरेलू नौकर हेमराज की हत्या] को अंजाम दिया।


इससे पहले पुलिस ने डा। तलवार को आज सुबह ही गिरफ्तार किया। उधर, आरुषि की मां डा. नुपूर तलवार और डा. राजेश की महिला मित्र डा. अनीता दुर्रानी को भी पूछताछ के लिए हिरासत में ले लिया गया। वहीं, पुलिस हत्या में प्रयुक्त हथियार और हेमराज के मोबाइल को अब तक बरामद नहीं कर पाई है।


हालांकि आज की प्रेस कांफ्रेंस में पुलिस इस दोहरे हत्या की स्पष्ट वजह नहीं बता पाई लेकिन डा। तलवार को गिरफ्तार करने के उपरांत कत्ल की इस सनसनीखेज वारदात से पर्दा उठाने का दावा किया है।


यद्यपि पुलिस की कहानी में कई ऐसे पेंच हैं जिनका जवाब पुलिस के पास अभी भी नहीं है। पुलिस के अनुसार डा। तलवार ने अपनी पुत्री आरुषि और नौकर हेमराज को आपत्तिजनक अवस्था में देखने के बाद दोनों को ठिकाने लगा दिया। समझाने के बहाने पहले वह हेमराज को छत पर लेकर गया, जहां उसकी हत्या कर दी। बाद में अपने कमरे में आकर शराब पी तथा फिर उसके बाद बेटी को मौत की नींद सुला दिया। वारदात में डाक्टर ने पहले हथौड़ीनुमा वस्तु से सिर पर वार किया, फिर किसी धारदार हथियार से दोनों के गले की नसें काट डाली थीं।

हालांकि पुलिस अभी वारदात में प्रयुक्त हथियार तथा मोबाइल फोन बरामद नहीं कर पाई है। पुलिस का यह भी दावा है कि डा। राजेश तलवार के संबंध किसी अन्य महिला से थे जिसकी जानकारी आरुषि व हेमराज को थी।


उधर, अदालत में पेश करते समय डाक्टर राजेश तलवार ने पुलिस पर उसे झूठा फंसाने का आरोप लगाया है। ज्ञात हो कि गत 15 मई की रात में सेक्टर-25 जलवायु विहार निवासी डाक्टर दंपति राजेश तलवार की पुत्री आरुषि [14] और उनके घरेलू नौकर हेमराज [45] की हत्या कर दी गई थी।
मेरठ परिक्षेत्र के पुलिस महानिरीक्षक गुरुदर्शन सिंह ने इस दोहरे हत्याकांड का खुलासा करते हुए बताया कि आरुषि के कत्ल की सूचना मिलने पर जांच के लिए पहुंची पुलिस टीम को डा। राजेश तलवार ने खुद को काफी दुखी दिखाते हुए नौकर हेमराज को तत्काल गिरफ्तार करने को कहा। पुलिस टीम को मौके की सही ढंग से जांच भी नहीं करने दी गई। टीम ने जब उनसे छत पर लगे दरवाजे की चाबी मांगी तो उन्होंने कहा कि जांच बाद में कर लेना नहीं तो नौकर फरार हो जाएगा।


घटना के अगले दिन 17 मई को जब पुलिस ने छत से हेमराज का शव बरामद किया तो यह बात सामने आई कि उसकी हत्या भी उसी तरह की गई थी जिस तरह आरुषि को मारा गया था।
पुलिस महानिरीक्षक के अनुसार दोनों की हत्या एक ही रात में कुछ अंतराल पर हुई। हत्यारे ने दोनों के सिर पर हथौड़ीनुमा वस्तु से वार किया था तथा बाद में किसी धारदार हथियार से उनके गले की नसें काट दी थीं।


गौरतलब है कि इस दोहरे हत्याकांड को सुलझाने के लिए नोएडा पुलिस के साथ एसटीएफ को भी काम पर लगाया गया। पुलिस की टीमों ने कई बिंदुओं से मामले की जांच की। लेकिन हर बार शक की सुई घर में मौजूद सदस्यों के इर्द गिर्द ही घूमकर रह जाती थी। आरुषि के घर में काम कर चुके नौकरों, उसके दोस्तों व हेमराज के परिजनों आदि से भी लंबी पूछताछ की गई। तब इस बात का पता चला कि आरुषि के पिता डा। राजेश तलवार के किसी महिला से अवैध संबंध थे। इसका जिक्र हेमराज ने अपने दोस्तों से करते हुए अपनी जान का भी डाक्टर से खतरा जताया था।


इसके आधार पर पुलिस ने डा। तलवार और उनकी पत्‍‌नी नुपुर तलवार से कई राउंड पूछताछ की। इस दौरान कई ऐसी बातें सामने आई, जिससे पुलिस का शक और गहरा हो गया। मसलन घर में दो लोगों की हत्याएं हों और घर में सोए हुए लोगों को पता नहीं चला? दूसरा राजेश तलवार के मोबाइल फोन कॉल की जांच में पता चला कि वह 15 मई की रात्रि में करीब 12 बजे तक अपने किसी परिचित से बात कर रहे थे। इससे साफ था कि वह घटना के समय गहरी नींद में नहीं थे। इस आधार पर संदेह पुख्ता हुआ और पुलिस ने शुक्रवार सुबह डा. राजेश को उनके घर से गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने आरोपी डाक्टर को अदालत में पेश किया जहां से उन्हें चौदह दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया। पुलिस अब उनके रिमांड की तैयारी कर रही है।


पुलिस महानिरीक्षक गुरुदर्शन सिंह ने कत्ल की वजह बताते हुए कहा कि डा। राजेश तलवार ने देर रात अपनी बेटी के कमरे का दरवाजा खुला होने पर अंदर झांका तो उन्हें नौकर हेमराज तथा बेटी आरुषि आपत्तिजनक अवस्था में मिले पर वह यौन संबंध नहीं बना रहे थे। इससे वह गुस्से में आ गए। नौकर को समझाने के बहाने उन्होंने छत पर भेजकर आरुषि को उसके कमरे में बंद कर दिया। इसके बाद डा. राजेश हथौड़ीनुमा वस्तु तथा एक धारदार हथियार लेकर छत पर गए जहां पर उन्होंने पहले हेमराज के सिर पर वार किया तथा बाद में उसके गले की नसें काट दी। इसके बाद डाक्टर घर में नीचे आए और कमरे में जाकर शराब पी। फिर वह आरुषि के कमरे में पहुंचे तथा नौकर की ही तरह उसका भी कत्ल कर दिया।


पुलिस अधिकारियों के अनुसार डा। राजेश के एक अन्य महिला के साथ में अवैध संबंध थे, जिसका पता आरुषि को चल गया था। इसका जिक्र उसने घर के नौकर हेमराज से भी किया था। तभी से नौकर व आरुषि एक दूसरे के करीब आ गए थे। इसके अलावा डा. राजेश इस बात से भी गुस्से में थे कि हेमराज उनके अवैध संबंधों की बात बाहर भी बता चुका था। इस बात से भी डा. राजेश अपने नौकर से नाराज चल रहा था। नौकर के कत्ल के बाद डाक्टर ने हेमराज के शव को छत पर रखे कूलर के ढक्कन से ढकने के बाद छत के गेट पर ताला जड़ दिया था। उसका इरादा आरुषि के कत्ल का आरोप हेमराज पर लगाकर उसके शव को भी गायब कर देना था, लेकिन मौके पर मीडिया व पुलिस की मौजूदगी के चलते वह सफल नहीं हो पाया। पुलिस अभी वारदात में अन्य किसी व्यक्ति की भूमिका की भी जांच कर रही है। यह और बात है कि पुलिस के हाथ अभी तक दोनों हत्याओं में प्रयुक्त हथियार, खून से सने हुए कपड़े तथा मोबाइल फोन नहीं लगे हैं।


उधर, अदालत में पेशी के लिए जाते हुए डा. राजेश तलवार ने स्वयं को बेकसूर बताते हुए पुलिस पर उसे फंसाने का आरोप लगाया है। वहीं पुलिस के आला अधिकारियों का कहना है कि डाक्टर को रिमांड पर लेने के बाद मामले से जुड़ी कई अन्य कड़ियों से भी पर्दा उठ सकेगा।
उधर, बेटी व नौकर की हत्या करने के आरोपी डा। राजेश तलवार को फोर्टिस अस्पताल प्रबंधन ने विजिटिंग कंसलटेंट के पद से हटा दिया है। दंत रोग विशेषज्ञ राजेश तलवार के दिल्ली समेत कई क्लीनिक व अस्पताल में दांत संबंधी रोगियों की जांच करते थे।


डा. तलवार के खिलाफ ऐसे मिले सुराग

1. हत्या के बाद डा. तलवार ने पुलिस को सूचित करने की बजाय पड़ोसियों को बुलाया।
2.15 मई को कत्ल रात में 12 से दो बजे के बीच हुआ। इस रात डा. तलवार 12 बजे तक लोगों से फोन पर बात करता रहा। अगर कातिल बाहर से आता तो इसकी भनक उसको लगती।
3. घर में आने को तीन दरवाजे पार करने पड़ते हैं। ऐसे में बाहर से आने वाले हत्यारा जोर-जबरदस्ती किए बिना घर में नहीं घुस सकता था। इससे पुलिस को लगा कि हत्यारा घर में ही मौजूद था।
4. नौकर हेमराज व आरुषि की हत्या एक ही दिन हुई पर शव दो दिन बाद छत पर मिला। हत्या के बाद शव को कूलर के ढक्कन से ढका गया, जिससे शव को कड़ी धूप में सड़ने से बचाया जा सके। इससे लगा कि यह सोची समझी रणनीति है।
5. आरुषि की हत्या के बाद खून से सना गद्दा पड़ोसी की छत पर रखा गया। इससे साफ हो गया कि कातिल अगर बाहर का था तो वह हत्या के अगले दिन घर में घुसकर गद्दे को छत पर कैसे ले गया।
6। पुलिस ने डा. तलवार व उसके वकील के बीच हुई बातों को टेप किया। बातचीत में पुलिस को कुछ अहम बातों का पता लगा।

डाक्टर की करतूत से पड़ोसी स्तब्ध

आरुषि हत्याकांड में पिता के हाथ होने की खबर ने लोगों को स्तब्ध कर दिया है। आरुषि व हेमराज की हत्या डा। राजेश तलवार ने ही की थी, लोग इस पर यकीन भी नहीं कर पा रहे। जैसे ही पुलिस ने आरुषि व नौकर हेमराज की हत्या में डा. तलवार की संलिप्तता की बात कही, सभी भौचक्के रहे गए। सच्चाई सामने आते ही लोगों की भीड़ सेक्टर-25 स्थित डा. तलवार के घर पर पहुंचना शुरू हो गई। उसी सेक्टर में रहने वाले सुबोध सूद ने बताया कि डाक्टर द्वारा अपनी बेटी की हत्या करना आश्चर्यचकित करता है और वे इस घटना से स्तब्ध हैं।


वहीं उन्होंने बताया कि मैं भी अपनी बेटी के दांतों का इलाज कराने उनके पास ले गया था, लेकिन ज्यादातर समय उनकी क्लीनिक पर कोई महिला डाक्टर होती थी। ऐसे में उनसे मुलाकात नहीं हो पाई थी। सेक्टर-25 में रहने वाली 69 वर्षीय विभाप्रिया बताती है कि बाप द्वारा बेटी की हत्या करना मैं सपने भी नहीं सोच सकती। इसी सेक्टर के एसके ग्रोवर बताते हैं कि यहां एक डाक्टर बाप ने हैवानियत की कई हदें पार कर अपनी बेटी की हत्या कर दी। ऐसे कई सवाल लोगों के जेहन में अब भी कौंध रहे हैं कि एक पिता अपनी बेटी की हत्या कैसे कर सकता है?

आरुषि हत्याकांड एक नजर में

16 मई- नोएडा के जलवायु विहार में रहने वाले डा. राजेश तलवार की चौदह साल की बेटी आरुषि का शव सुबह कमरे से बरामद, गले पर तेज धारदार वाले चाकू से वार करके हत्या की गई, वारदात का शक घर से लापता नौकर हेमराज पर। नौकर की तलाश में पुलिस टीम नेपाल के लिए रवाना।
17 मई- घटना के तीस घंटे बाद डा. राजेश और नुपुर तलवार के फ्लैट की छत से नौकर हेमराज का शव बरामद, उसकी हत्या भी गले पर तेज धार वाले हथियार से की गई।
-दोनों की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में खुलासा कि आरुषि व हेमराज का कत्ल 15 मई को हुआ।
-जिस गद्दे पर आरुषि का शव पड़ा था, वह गद्दा घर की बजाय छत पर मिला।
-मामले की जांच एसटीएफ को सौंपी गई।
-एसपी सिटी व सेक्टर बीस के थाना प्रभारी का तबादला।
18 मई-एसटीएफ ने आरुषि के परिजनों से पूछताछ की।
-पुलिस ने वारदात के समय आरुषि के बेड पर बिछा गद्दा जांच के लिए कब्जे में लिया।
-19 मई-पुलिस ने हत्याकांड में महत्वपूर्ण सुराग मिलने का दावा किया, एसएसपी सतीश गणेश ने दो दिन में मामले से पर्दा हटाने की बात कही।
-डाक्टर परिवार के पूर्व नौकर विष्णु समेत कई लोगों से पूछताछ।
-डाक्टर परिवार भी शक के घेरे में।
20 मई- प्रदेश के डीजीपी का बयान, जल्द होगा मामले का खुलासा।
- घटना में प्रयुक्त हथियार की बरामदगी के लिए एनसीआर में छापे।
- पांच दिन बाद पुलिस को याद आई डाक्टर राजेश के गैराज की तलाशी।
21 मई- आरुषि के पिता का मीडिया में बयान, हत्या के विषय में कुछ नहीं पता।
-पुलिस का बयान, जल्द होगा खुलासा।
-दिल्ली पुलिस क्राइम ब्रांच की टीम भी मौके पर पहुंची।
22 मई -पहली बार एसएसपी ने मीडिया के सवालों के जवाब देने को प्रेसवार्ता की।
-बिसरा व फोरेंसिक रिपोर्ट के लिए एसएसपी ने आगरा संपर्क किया।
-पुलिस ने ऑनर किलिंग की थ्योरी पर जांच शुरू की।
-आरुषि के दोस्त अनमोल से भी पूछताछ।
23 मई - पुलिस ने आरुषि की हत्या के आरोप में उसी के पिता डा. राजेश तलवार को गिरफ्तार किया।
-अदालत ने डा. तलवार को 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेजा।


http://in.jagran.yahoo.com/news/national/crime/5_18_4474651.html

Thursday, May 22, 2008

छिंदवाड़ा की जेल से आते थे मुंबई में हुक्म

छिंदवाड़ा की जेल से आते थे मुंबई में हुक्म

डेटलाइन इंडिया

भोपाल, 7 मार्च-मध्य प्रदेश की छिंदवाड़ा जेल में बंद एक डाकू अपने गिरोह को अपने मोबाइल से लगातार आदेश देता रहा और जब तक वह जेल में रहा और उसका मोबाइल पकड़ा नहीं गया, तब तक वह दस करोड़ रुपए कमा चुका था।

पापड़या कालिया नाम के इस डाकू के खिलाफ महाराष्ट्र में बहुत सारे मामले दर्ज हैं और छिंदवाड़ा चूंकि मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र की सीमा पर स्थित है इसीलिए वह इस जिले में भी वारदातें करवाता था। ऐसे ही एक मौके पर मध्य प्रदेश पुलिस ने उसे गिरफ्तार किया और अदालत के आदेश पर उसे न्यायिक हिरासत में छिंदवाड़ा जेल भेज दिया गया। कालिया जेल में था और उसकी पत्नी रेखा गिरोह संभाल रही थी।

रेखा को जल्दी ही पुलिस ने गिरफ्तार किया और उस पर मकोका कानून की धाराएं लगाई गईं। मकोका विशेष अदालत के सामने दिए गए बयान में रेखा ने जो बताया, उससे तो अदालत में मौजूद सभी लोगों के होश उड़ गए। रेखा ने कहा था कि उसका पति कालिया छिंदवाड़ा की जेल से उसे और गिरोह को नियमित निर्देश देता है और उन्हीं के आधार पर गिरोह डकैतियां डालता है।


कालिया और उसके तीन साथी अगस्त, 2007 में जब पकड़े गए थे, तो उनके पास से लाखों रुपए के अलावा 18 किलो सोना बरामद हुआ था। अभी तक पुलिस कुल छत्तीस मामलों का पता लगा पाई है और कालिया तमाम दबावों के बावजूद पुलिस के सामने अपने धंधे के रहस्य खोलने पर राजी नहीं हुआ। कालिया उस गिरोह का सदस्य भी था, जिसे मुंबई के लोखंडवाला में हुए एक एनकाउंटर में मार डाला गया था और इस घटना पर एक मशहूर फिल्म शूट आउट इन लोखंडवाला भी बन चुकी है।


रेखा ने अदालत में जब यह बयान दिया तो पहले तो किसी को भरोसा नहीं हुआ। फिर मुंबई उच्च न्यायालय के जज डी जी कार्णिक ने अपने सहयोगी से उस नंबर पर डायल करने के लिए कहा, जिससे कालिया अपनी पत्नी रेखा को फोन किया करता था। अदालत के फोन में एसटीडी नहीं थी इसीलिए रेखा से ही फोन ऑन करवाया गया और अदालत के सामने उसने अपने पति कालिया से बात की।


मकोका अदालत ने निर्देश तो यह दिया था कि छिंदवाड़ा जेल के अधीक्षक को कैद करके उनके सामने पेश किया जाए, लेकिन मध्य प्रदेश सरकार ने एक सब जेलर को, जो हेड कांस्टेबल दर्जे का होता है, निलंबित करके उसके खिलाफ जांच बैठा दी। कालिया अब भी छिंदवाड़ा जेल में है और उसकी पत्नी रेखा मुंबई की ऑर्थर रोड जेल में।

http://aaloktomar.blogspot.com/2008/03/blog-post_07.html

भोपाल गैस कांड




बाबा धरणीधर



भोपाल गैस कांड

(बाबा धरणीधर की मशहूर कविता से चुनिदा लाइनें .... )

हर जिस्म जहर हो गया एक दिन
मुर्दों का शहर हो गया भोपाल एक दिन
...........................

सर्दी की रात थी वो क़यामत की रात थी
दोजख की आग थी वो भयानक सी रात थी
जो भी हो मगर ये भी एक बात थी
कि तहजीबो तरक्की के गिलाजत की रात थी
...................

मासूम कोई चीखता अम्मी मुझे बचा
मरती बहन भी टेरती भैय्या मुझे उठा
कहता था कोई आँख से आंसू बहा बहा
मरते दफा तो बाप को बेटा खुदा दिखा
...............................................

फर्क था न लाश को जात पांत का
नस्ल रंग आज सब साथ साथ था
हिंदू का हाथ थामते मुस्लिम का हाथ था
जां जहाँ था मौत के हाथ था
..................................

देखा गया न जो कभी सोचा गया
नहीं दर्द को भी पी गई भोपाल की जमीं
खुदा करे ये हादसा गुजरे न अब कहीं
शायद ही अगली peediyan इसपे करे यकीं

.................................

हर जर्रा शरर हो गया भोपाल एक दिन
मुर्दों का शहर हो गया भोपाल एक दिन
...............................................................

Tuesday, May 20, 2008

पत्रकार एवं साहित्यकार बाबा स्व. श्री संपतराव धरणीधर


पलंग पर लेटे हुए बाबा धरणीधर के साथ हनुमंत मनगटे और दामोदर सदन .

पत्रकार एवं साहित्यकार बाबा स्व. श्री संपतराव धरणीधर


जन्म १० मार्च , १९२४ और निधन १५ मई , २००२

रचनाए
- गजल संग्रह " किस्त किस्त जिंदगी "
कविता और लोकगीतों का संग्रह " महुआ केशर "
कविता संग्रह - नहीं है मरण पर्व
नहीं है मरण पर्व के बारे में कुछ खास बातें ...

संस्करण - प्रथम - 2003

प्रमुख कविताये ...

टाइटल कविता मरण पर्व के अलावा
भोपाल गैस कांड ,
दिल्ली ,
मेरा मध्यप्रदेश ,
२१ वीं सदी के लिए ,
भूख - भरे पेट की ,
किस आंधी का शोर हुआ है ,
आदमी ,
क्यों मौसम बेइमान हुआ है ,
बस्ती
साहित्यकार से एक परिचय ...

Monday, May 19, 2008

छिंद के वाडे के नाम पर पड़ा छिंदवा़ड़ा...





छिंदवाड़ा : ऐतिहासिक तथ्य

एक समय छिंदवा़ड़ा जिला छिंद के पे़ड़ों से भरपूर था इसलिए इसका नाम छिंद के वाडे के नाम पर छिंदवाड़ा पड़ा। वहीं दूसरी ओर कहा जाता है कि छिदंवाड़ा में शेरों की संख्या काफी अधिक थी। यहां काफी संख्या में शेर आते थे। इसलिए इसे सिंहद्वार भी कहा जाता था।

छिंदवाड़ा में कभी भक्त बुलुंद का राज हुआ करता था। इसने तीसरी शताब्दी में यहां शासन किया। इसके बाद राष्ट्रकुट ने नीलकंठ गांव बसाया। उसने 7वीं सदी तक राज किया। इसके पश्चात गौंडवाना राजाओं ने राज किया। उन्होंने देवगढ़ को अपनी राजधानी बनाया तथा देवगढ़ में किले का निर्माण भी किया। यहां भक्त बुलुंद सबसे शक्तिशाली राजा था। उसने औरंगजेब की हुकूमत के समय मुस्लिम धर्म अपना लिया था। इसके बाद यहां पर राजपाट बदलता रहा। अंत में 1803 में अंतिम मराठा शासन समाप्त हुआ और 17 सितम्बर 1803 को ईस्ट इंडिया कंपनी ने रघुजी-द्वितीय को परास्त कर अपना आधिपत्य स्थापित किया।

स्वतंत्रता के बाद नागपुर की राजधानी छिंदवाड़ा को बनाना चाहते थे।
1 नवंबर, 1956 को इस जिले का पुनर्गठन किया गया।

आकर्षक स्थलः



पातालकोट जिले का प्रख्यात दर्शनीय स्थल हैं
तामिया जनजातीय संग्रहालय
छोटा महादेव की गुफा
देवगढ़ का किला
नदादवाड़ी
गर्म पानी का फुहारा, अनहोनी
राधादेवी की गुफाएं
जामसावली हनुमान मंदिर, सौंसर

छिंदवाड़ा :

छिंदवाड़ा जिले का गठन 1 नवंबर, 1956 को हुआ। यह सतपुड़ा पर्वत माला के दक्षिण-पश्चिमी में स्थित है। यह 21।28 से 22.49 डि. उत्तरी देशांतर और 78.40 से 79.24 डिग्री पूर्वी अक्षांश में 11,815 वर्ग कि.मी. क्षेत्र में फैला हुआ है। जिले की सीमा दक्षिण में महाराष्ट्र के नागपुर जिले, उत्तर में मप्र के होशंगाबाद और नरसिंहपुर, पश्चिम में बैतूल एवं पूर्व में सिवनी जिले से लगी हुई है। छिदंवाड़ा जिला क्षेत्रफल की दृष्टि से प्रदेश में पहले नंबर पर है। जो प्रदेश के कुल क्षेत्रफल का 3.85 प्रतिशत है। यह जिला 9 तहसीलों (छिंदवाड़ा, परासिया, जुन्नारदेव, तामिया, अमरवाड़ा चौरई, बिछुआ, सौसर और पांढुर्णा) में बंटा हुआ है। जिले में 11 विकासखंड (छिंदवाड़ा, परासिया, जुन्नारदेव, तामिया, अमरवाड़ा, चौरई, बिछुआ, हर्रई, मोहखेड़, सौसर और पांढुर्णा) हैं। जिले में 4 नगर पालिकाएं (छिंदवाड़ा, परासिया, जुन्नारदेव, और पांढुर्णा) हैं। वहीं 8 नगर पंचायतें (सौसर, अमरवाड़ा, चांदामेटा भूतरिया, न्यूटन चिकली, हर्रई, मोहगांव, चौरई और लोधीखेड़ा है। वहीं 10 छोटे कस्बे (दीघावनी, जाटाछापर, इकलहरा, पगारा, काली छापर, दमुआ, पाला चौरई, बम्हौरी, अम्बाड़ा और बड़कुही हैं। जिले में 1984 गांव हैं। इनमें से 1903 गांवों को 19 राजस्व मंडल और 319 पटवारी हल्कों में बांटा गया है। जिले में 808 पंचायतें हैं। प्रमुख औद्योगिक इकाईयां : हिन्दुस्तान लीवर लिमिटेड, लहगड़ुआ रेमण्ड वूलन मिल्स लिमिटेड, बोरगांव पी.बी.एम. पोलीटेक्स लिमिटेड, बोरगांव सुपर पैक (बजाज) ग्राम सावली भंसाली इंजीनियरिंग पोलीमर्स, सातनूर सूर्यवंशी स्पिनिंग मिल्स, ग्राम राजना शशिकांत एंड कम्पनी, जुन्नारदेव रूबी इंजीनियंरिग वर्क्स छिंदवा़ड़ा ईश्वर इंडस्ट्रीज खजरी,

Saturday, May 17, 2008

छिंदवाड़ा का बादल भोई tribal म्यूज़ियम




वर्ल्ड म्यूज़ियम डे १८ मई स्पेशल जनजातीय म्यूज़ियम

chhindwara में जनजातीय म्यूज़ियम की शुरूआत 20 april 1954 में हुई थी .
वर्ष 1975 को इसे स्टेट म्यूज़ियम का दर्जा दिया गया .

8 सितम्बर १९९७ को इसका नाम बदलकर श्री बादल भोई tribal म्यूज़ियम कर दिया गया . असल में श्री बादल भोई जिले के क्रन्तिकारी जनजातीय नेता थे . उनका जन्म 1845 में परासिया तहसील के dungria titra गाँव में हुआ था । उनके नेतृत्व में हजारों आदिवासियों ने १९२३ में कलेक्टर के बंगले पर एकत्र होकर प्रदर्शन किया था। इस दौरान उन पर लाठियाँ बरसाई गईं और गिरफ्तार कर लिया गया.
२१ अगस्त १९३० को अंग्रेजों के शासनकाल में उन्हें रामाकोना में वन नियमों का उल्लंघन करने के जुर्म में चन्दा जेल में बंद कर दिया गया था। उन्होने इसी जेल में अंग्रेजों द्वारा जहर दिए जाने के कारण वर्ष १९४० में अपने प्राण गंवा दिए. राष्ट्र कि आजादी में उनके इस बलिदान के कारण traibala म्यूजियम का नाम बदलकर श्री बदल बोई स्टेट traibala म्यूजियम कर दिया गया.

पर्यटकों के लिए १५ अगस्त २००३ से यह म्यूजियम रविवार तक खोला जाता है। जनजातीय सोध संगठन प्रमुख के निर्देश और चपरासियों के सुपुर्द है. इसमें ११ कमरे और ४ गैलारियाँ हैं. इसमें करीब ४५ जनजातीय संस्कृतियों और सभ्यताओं का वर्णन मिलता है.
यह मध्य प्रदेश का सबसे पुराना और बड़ा म्यूजियम है । सितम्बर २००३ से इस म्यूजियम में प्रवेश के लिए २ रुपये का शुल्क निर्धारित किया गया है. इससे पहले इस म्यूजियम में प्रवेश के लिए कोई शुल्क नहीं देना पड़ता था. यहाँ प्रतिदिन १००-१५० लोग आते हैं.

जो स्वतः ही इस म्यूजियम के प्रति लोगों के रुझान की स्पष्ट गवाही देता है।
वर्ष ---- पर्यटक
2000 ---- 9, 518
2001 ---- 82, 582
2002 ---- 96, 477
2003 ---- 75, 857
2004 ---- 36, 553
2005 ---- 35, 612

इस म्यूजियम में जिले की जनजातियों से सम्भंधित इक़ से इक़ अद्भुत चीजें हैं। इसमें घर, कपडे, जेवरात, हथियार, कृषि के साधन, कला, संगीत, नृत्य, त्यौहार, देवी-देवता, धार्मिक गतिविधियाँ, आयुर्वेदिक संग्रह जैसी वस्तुएं के बारे में विस्तृत जानकारी मिलती है. यह म्यूजियम जनजातीय संप्रदाय की उन्नत परम्पराओं और प्राचीन संस्कृति पर प्रकाश डालता है. जिले में गौंड और बैगदो प्रमुख जनजातियाँ थीं. इसमें उन लोगों के परिवार के रहने सहने के ढंग का भी वर्णन मिलता है. इसमें यह भी जानकारी मिलती है कि अगरियाजन्जाती के लोग किस तरह लोहे को मोदते थे. इन बातों को अगर इक़ लाइन में कहा जाए तो यह म्यूजियम जिले की जनजातीय के बारे में जानकारी जुटाने का सर्वथा उपयुक्त साधन है.

म्यूजियम की समय सारिणी और अवकाश
पर्यटकों के लिए घुमाने का समय

१ अप्रेल से ३० जून- सुबह ११:३० से शाम ६:३० बजे तक।
१ जुलाई से ३१ मार्च- सुबह १०:३० से शाम ५ बजे तक

****नोट: रविवार को छोड़कर सभी सरकारी छुट्टियों और सोमवार को म्यूजियम बंद रहता है।
(स्त्रोत: ट्राईबलम्यूजियम, छिंदवाड़ा के शोध अधिकारी)

Friday, May 16, 2008

१७ मई : आज मे भइया के ऑफिस मे दो बजे रात तक


आज मे भइया के ऑफिस मे दो बजे रात तक बैठा हूँ . यह पेपर कैसे छपता ये देखने के लिए मे आया था .पर बाकि ऑफिस देखने मे भी काफी मजा आया .ऑफिस एकदम शानदार बहुमंजिला इमारत है .जिसमे कई सारे कमरे है साथ ही यह पर एक बड़ा सा रिसेप्शन रूम और एक बड़ा सा रेस्टोरेंट की तरह भोजन कक्ष है.यही पर नीचे मे साडी मशीने है जो की काफी बड़ी है.इनमे पेपर छपते देखना मेरे लिए काफी रोमांचकारी अनुभव था ।

कहते है ये सभी लगभग ४ से ५ लाख कीमत की है इनमे टेलीफोन के वायर रोल की तरह ही पेपर रोल लगते है जोकि १५० किलो के होते है और लगभग १५ किलोमीटर लंबे है. मशीन मे ये पुरा रोल फसाया जाता है .पेपर पहले मेटल प्लेट मे छपता है फिर उसकी कॉपी पेपर मे आती है .इनका ऑफिस किसी फिल्मी ऑफिस की तरह ही दिखता है जो आकर्षक है इसमे हर किसी की अलग डेस्क है और हर डेस्क पे १ कंप्यूटर रखा होता है .साथ ही जैसा की मेरा अंदाज था की यह एयर कंदिशनेर की ठंडी तजि हवा आती है .जिसके कारन हमारेम भइया जी दिन बा दिन गोरे होते और निखरते जा रहे है ।

और क्या कहूँ यहाँ का स्टाफ वैसे तो मुझे ठीक ही लगा. और हाँ युः कियो छत से नजर और आसमान काफी साफ नजर आता हैं मुझे तो ये जगह काफी अच्छी लगी . ये बिल्डिंग काफी आधुनिक और कई अत्याधुनिक सुविधाओं से युक्त है यह पे टीवी भी है (कुल मिलाकर काफी मजेदार और रोमांचकारी अनुभव रहा ये ।)

@ आपका अखिलेश पवार@

chhindwara छबि





Thursday, May 1, 2008

घर की याद


शायद ही कोई ऐसा हो जिसको ना आती हो ... घर की याद
चंद दिनों बाद में घर जा रहा हूँ.

मेरे लिए ... अब दुनिया कितनी बड़ी हो गई है ...
... कहाँ तो बचपन में 25 किलो मीटर दूर का पता नहीं था
अब मैं हजार किलो मीटर से ज्यादा दूरी पर रह रहा हूँ ...
मुझको अब ... हजारों- हजार मील की दुनिया भी पता है ...

दिल्ली से भोपाल ... भोपाल से नागपुर ...
नागपुर से तन्सरामल ( उमरानाला ) ...
नागपुर में दोस्तों से मुलाकात ...उसके बाद घर ...