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Monday, December 12, 2022

Rachna Dairy : मेरी कविता - खबरों का नशा

| मेरी कविता - खबरों का नशा |

खबरों में भी, 
नशा होता है।
कुछ खबरों को पढ़ने
से नशा हो जाता है।

लेकिन उस नशे से कुछ नहीं मिलता।
ऐसी नशीली खबरों की संख्या बढ़ रही है,
बढ़ाई जा रही है
ताकि आप पर इसका नशा
एक बार चढ़ जाए तो उतरे ना।
ऐसी नशीली खबरों से बचें।

नशा कीजिए
अच्छी खबरों का, 
जिससे आपको कुछ हासिल हो।
ज्ञान मिले, प्रेरणा मिले, 
आनंद मिले, मन को शांति मिले।

बुरी खबरों की
दुनिया से दूर रहे।
क्योंकि खबरों में भी
नशा होता है।

©® *रामकृष्ण डोंगरे Ramkrishna Dongre Pawar तृष्णा*

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Thursday, December 30, 2021

मेरी कविता : हिंदू राष्ट्र

हर कोई
हिंदू राष्ट्र बनाने में जुटा है... 
पूरी दुनिया को
हिंदू राष्ट्र बना दो। 
(फोटो प्रतीकात्मक) 

मिटा दो
पूरी दुनिया को।
फिर अपने हाथ से बना दो।

बना सकते हो?

ये देश
ये दुनिया
आज जिस रूप में है
उसे बनने में
सदियां लगी है।

... और सदियों में
कोई बनाता है।

तुम चाहकर भी
पलभर में कुछ नहीं बना सकते. 
इसलिए इस मुगालते में मत रहो।
हिंदू राष्ट्र, हिंदू राष्ट्र, हिंदू राष्ट्र... 

भूल जाओ...

©® रामकृष्ण डोंगरे तृष्णा
रचना काल : 30 दिसंबर 2021, रायपुर

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Sunday, February 18, 2018

कुछ आदमी अच्छे होते हैं...

कुछ आदमी अच्छे होते हैं,
कुछ आदमी बुरे होते हैं।

कुछ बिहारी अच्छे होते हैं,
कुछ बिहारी बहुत बुरे होते हैं।
कुछ उड़िया अच्छे होते हैं,
तो कुछ उड़िया बुरे भी होते हैं।

कुछ मध्यप्रदेशी अच्छे होते हैं,
तो कुछ मध्यप्रदेश अच्छे नहीं भी होते हैं।
कुछ यूपी के भैया अच्छे होते हैं,
तो कुछ यूपी वाले बुरे भी होते हैं।

मतलब
बुराई का संबंध किसी जाति-धर्म,
प्रदेश या देश से नहीं है।
ये किसी भी इंसान में हो सकती है।
मगर अपनी बुराई,
अपनी कमियों को छुपाना
या नियंत्रण करना हमें आना चाहिए
और अपनी अच्छाइयों को
दूसरों के सामने और अच्छे से
पेश करना हमें आना चाहिए।

©®रामकृष्ण डोंगरे तृष्णा
रचना समय - 19 फरवरी, 2018


Monday, February 12, 2018

रोज एक शायरी

दुनिया में जब आप जैसे अच्छे लोग है,
फिर क्यों मैं बुरे लोगों के बारे में सोचूं।

©®रामकृष्ण डोंगरे तृष्णा


Friday, August 18, 2017

वो लम्हा जरूर याद आता है

कोई आता है,
कोई जाता है।

वक्त-बे-वक्त
वो लम्हा जरूर याद आता है....

कोई रुलाता है,
कोई हंसाता है।

वो लम्हा जरूर याद आता है....

कोई याद रहता है,
कोई भूल जाता है।

वो लम्हा जरूर याद आता है...

|| अभी-अभी ||

रामकृष्ण डोंगरे #तृष्णा
18 अगस्त 2015
#रचना_डायरी


Tuesday, August 8, 2017

इंसान की जब सोशल लाइफ खत्म हो जाती है

इंसान की जब सोशल लाइफ खत्म हो जाती है
तो क्या बचता है
सिर्फ सोशल साइट...

मगर क्या वहां आपको
मिल पाता है चैन और सुकून...

Facebook के हजारों हजार फ्रेंड
उनकी हजारों-हजार पोस्ट
मुस्कुराते चेहरे
सेल्फी - वीडियो
मूवी और मॉल जाने की तस्वीरें

WhatsApp के दर्जनों पोस्ट
दर्जनों फनी वीडियो
दर्जनों ज्ञान की बातें
क्या आप को उनके करीब महसूस कर पाती है...

हजारों दोस्तों की इस दुनिया में भी
हम अपने आप को अकेला ही पाते हैं...

हम सब को जरूरत है
हमारे रीयल अपने
हमारे माता पिता
हमारे भाई बहन
हमारे पत्नी और बच्चे
उन सब के पास जाने की...

©® रामकृष्ण डोंगरे तृष्णा
रचनासमय : रायपुर, 8 अगस्त 2017

Sunday, March 7, 2010

महिला दिवस विशेष : दहलीज़ पर खडी एक लड़की

दरवाजे की दहलीज़ पर खडी एक लड़की सोच रही है। ' मैं लड़की हूँ ' इसमें मेरा क्या दोष है। मैं भी इस दहलीज़ के बाहर जाना चाहती हूँ। अपनी मंजिल को मैं भी पाना चाहती हूँ। फिर क्यों मुझे बाहर जाने से रोका जा रहा है। आखिर क्यों ? और किसलिए ? क्या सिर्फ इसलिए कि मैं एक लड़की हूँ। मैं लड़की हूँ इसमें मेरा क्या दोष... मैं भी अपनी मंजिल को पाना चाहती हूँ दरवाज़े की दहलीज़ पर खडी एक लड़की सोच रही है। रामकृष्ण डोंगरे

Monday, February 4, 2008

बस मस्ती

ना दोस्ती कि जाये ना दुश्मनी कि जाये,
करना है गर कुछ तो बस मस्ती कि जाये.
...trishna