Monday, December 12, 2022
Rachna Dairy : मेरी कविता - खबरों का नशा
Thursday, December 30, 2021
मेरी कविता : हिंदू राष्ट्र
Sunday, February 18, 2018
कुछ आदमी अच्छे होते हैं...
कुछ आदमी अच्छे होते हैं,
कुछ आदमी बुरे होते हैं।
कुछ बिहारी अच्छे होते हैं,
कुछ बिहारी बहुत बुरे होते हैं।
कुछ उड़िया अच्छे होते हैं,
तो कुछ उड़िया बुरे भी होते हैं।
कुछ मध्यप्रदेशी अच्छे होते हैं,
तो कुछ मध्यप्रदेश अच्छे नहीं भी होते हैं।
कुछ यूपी के भैया अच्छे होते हैं,
तो कुछ यूपी वाले बुरे भी होते हैं।
मतलब
बुराई का संबंध किसी जाति-धर्म,
प्रदेश या देश से नहीं है।
ये किसी भी इंसान में हो सकती है।
मगर अपनी बुराई,
अपनी कमियों को छुपाना
या नियंत्रण करना हमें आना चाहिए
और अपनी अच्छाइयों को
दूसरों के सामने और अच्छे से
पेश करना हमें आना चाहिए।
©®रामकृष्ण डोंगरे तृष्णा
रचना समय - 19 फरवरी, 2018
Monday, February 12, 2018
रोज एक शायरी
दुनिया में जब आप जैसे अच्छे लोग है,
फिर क्यों मैं बुरे लोगों के बारे में सोचूं।
©®रामकृष्ण डोंगरे तृष्णा
Friday, August 18, 2017
वो लम्हा जरूर याद आता है
कोई आता है,
कोई जाता है।
वक्त-बे-वक्त
वो लम्हा जरूर याद आता है....
कोई रुलाता है,
कोई हंसाता है।
वो लम्हा जरूर याद आता है....
कोई याद रहता है,
कोई भूल जाता है।
वो लम्हा जरूर याद आता है...
|| अभी-अभी ||
रामकृष्ण डोंगरे #तृष्णा
18 अगस्त 2015
#रचना_डायरी
Tuesday, August 8, 2017
इंसान की जब सोशल लाइफ खत्म हो जाती है
तो क्या बचता है
सिर्फ सोशल साइट...
मगर क्या वहां आपको
मिल पाता है चैन और सुकून...
Facebook के हजारों हजार फ्रेंड
उनकी हजारों-हजार पोस्ट
मुस्कुराते चेहरे
सेल्फी - वीडियो
मूवी और मॉल जाने की तस्वीरें
WhatsApp के दर्जनों पोस्ट
दर्जनों फनी वीडियो
दर्जनों ज्ञान की बातें
क्या आप को उनके करीब महसूस कर पाती है...
हजारों दोस्तों की इस दुनिया में भी
हम अपने आप को अकेला ही पाते हैं...
हम सब को जरूरत है
हमारे रीयल अपने
हमारे माता पिता
हमारे भाई बहन
हमारे पत्नी और बच्चे
उन सब के पास जाने की...
©® रामकृष्ण डोंगरे तृष्णा
रचनासमय : रायपुर, 8 अगस्त 2017
