
पढ़िए उल्टा तीर पर डोंगरे की शादी पर सीधी बात। हिस्सा बनिए ब्लोगिंग जगत में पहली बार 'शादी' पर बहस का...और रखिये अपने विचार बेबाकी से उल्टा तीर पर। बहस शुरू हो चुकी है। उल्टा तीर

डोंगरे चला दुल्हनिया लेने ...ऐसी ही किसी मुलाकात में बाबा ने मेरे सामने अपना पत्र लेखक बनने का प्रस्ताव रखा। मैंने सहर्ष इसे स्वीकार कर लिया। इसके बाद मैं लगभग रोजाना बाबा के पास जाने लगा। पहले सात नंबर और बाद में ग्यारह नंबर कमरे में।
बाबा का कविता पाठ, इंटरव्यू मैंने आकाशवाणी छिंदवाड़ा से सुना था। जिसमें उनकी बातचीत और कविताओं ने मुझे आकृषित किया था। इसके साथ ही यह बात भी मुझे उनकी तरफ खींच रही थी कि वे मेरे गांव तन्सरामाल के नजदीकी कस्बे मोहखेड़ के रहने वाले थे। इसके अलावा बाबा का नाम और मेरे पिताजी का नाम भी एक-सा था। यानी बाबा संपतराव धरणीधर और श्री सम्पतराव डोंगरे। आज हमारे बीच न तो बाबा है और न मेरे पिताजी। मेरे मित्र अमिताभ दुबे कई बार मुझे बाबा का मानस पुत्र कहते हैं।आज है १० मार्च। बाबा का जन्मदिन। यानी सतपुड़ा के पुरखा लेखक, साहित्यकार, पत्रकार और कवि बाबा संपतराव धरणीधर का। 'मुझे फांसी पर लटका दो ... कि मैं भी एक बागी हूं' वाले बाबाजी। 'किस्त-किस्त जिंदगी' के रचियता। जब मैं बाबा से मिला वे ७५ बसंत पार कर चुके थे। बाबा से मेरी मुलाकात मेरे खास दोस्त 'रेडियो' के जरिए ही हुई। बाबा का कविता पाठ, इंटरव्यू मैंने आकाशवाणी छिंदवाड़ा से सुना था। जिसमें उनकी बातचीत और कविताओं ने मुझे आकृषित किया था। इसके साथ ही यह बात भी मुझे उनकी तरफ खींच रही थी कि वे मेरे गांव तन्सरामाल (उमरानाला) के नजदीकी कस्बे मोहखेड़ के रहने वाले थे। इसके अलावा बाबा का नाम और मेरे पिताजी का नाम भी एक-सा था। यानी बाबा संपतराव धरणीधर और श्री सम्पतराव डोंगरे। आज हमारे बीच न तो बाबा है और न मेरे पिताजी। मेरे मित्र अमिताभ दुबे कई बार मुझे बाबा का मानस पुत्र कहते हैं।

महिलाओं को शादी के बाद अपना सारा व्यक्तित्व, अपनी सारी काबिलीयत पति- बच्चे और परिवार पर न्यौछावार कर देनी चाहिए। देश कोई चीज नहीं हैं या...। चलिए देश की बात छोड़ भी दें, तो क्या आदमी का अपना कोई अस्तित्व नहीं होता ... अपनी कोई पहचान नहीं होती है... जब पुरूषों को अपनी पहचान, अपना अस्तित्व प्यारा होता है... तब महिलाएं क्यूँ न अपना अस्तित्व, अपना वजूद बनाए...। डोंगरे का बीवीनामा
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मशहूर ब्लॉगर रवि रतलामी की वेबसाईट रचनाकार पर भी पढिये,
एक सिम्पल मैन का बीवीनामा http://rachanakar.blogspot.com/2007/12/blog-post_24.html