Monday, February 22, 2010

... क्या जरूरी है शादी से पहले ?

... क्या जरूरी है शादी से पहले ?

पोस्ट से पहले ....
इस बार पोस्ट से पहले में हम उल्टा तीर पर चल रही बहस को लेकर आये है। बहस का टॉपिक है- क्या शादी से पहले लड़के और लड़की के बीच बातचीत होनी चाहिए ? क्या ये जरूरी नहीं कि शादी के बंधन में बंधने जा रहे दो युवाओं को अपने जीवन के बारे में बातचीत करनी चाहिए ? तो क्या इसके लिए हमारे समाज में माहौल है ?

ऐसे ही कई सवालों के जवाब जानने के लिए भाग लीजिये इस बहस में -
... क्या जरूरी है शादी से पहले ?

उसी ब्लॉग पर
जिसका नाम है,

उल्टा तीर ...

तीर वही जो घायल कर दे ....

http://ultateer.blogspot.com/2010/02/blog-post.html

Saturday, January 2, 2010

मुसलिम लड़कियों के सामने शादी की समस्या


नहीं मिल रहे काबिल दूल्हे
मूवमेंट फॉर मुसलिम इंपावरमेंट के सर्वे से खुलासा

- अभिभावकों की तरफ से यह जायज समस्या अब सामने आ रही है, की पढ़ी लिखी और काबिल बेटियों के हिसाब से रिश्ते नहीं मिल रहे हैं। - काजी, शरई अदालत दारु कजा
- मुसलिम समाज में शिक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ी है। प्रोफेशनल पढ़ाई कर चुकी काबिल लड़कियों के रिश्ते के लिए समाजसेवी संगठनों को आगे आना चाहिए। - मुसलिम लड़की

  • शरई अदालत दारुल कजा के सामने रहे दूल्हों की कमी के मामले
  • प्रोफेशनल कोर्स करने में लड़कियां आगे, लड़के फिसड्डी
  • पढ़ाई में मुसलिम लड़कों और लड़कियों में अनुपातिक अंतर
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प्रोफेशनल पढ़ाई में मुसलिम लड़कियों के बढ़ते कदम ने उनके अभिभावकों के सामने एक नई समस्या खड़ी कर दी है। ज्यादा पढ़ जाने से समाज में उनके लायक लड़कों की कमी हो गई है। व्यवसायिक शिक्षा में लड़कियों के लड़कों से आगे होने का खुलासा मूवमेंट फॉर मुसलिम इंपावरमेंट के सर्वे से हो चुका है। अब ऐसी लड़कियों के लिए लायक दूल्हों की कमी के मामले गाहे-बगाहे मुसलिम बुद्धिजीवियों और शरई अदालत दारुल कजा के सामने आ रहे हैं।

सर्वे के मुताबिक 60 फीसदी लड़कियां और 40 फीसदी लड़के व्यवसायिक शिक्षा ले रहे हैं। लेकिन मुसलिम समाज में प्रोफेशनल और नौकरीपेशा लड़कों की कमी से उनके सामने बेटियों की शादियों का संकट खड़ा हो गया है। सर्वे 600 प्रोफेशनल छात्र-छात्राओं पर कराया गया था। इसमें से करीब 370 लड़कियां और 230 लड़के विभिन्न क्षेत्रों में व्यवसायिक शिक्षा ले रहे हैं।

मूवमेंट फॉर मुसलिम इंपावरमेंट के महासचिव डा। इशरत सिद्दीकी ने बताया कि अभिभावक अपनी बेटियों के लिए प्रोफेशनल और नौकरीपेशा लड़कों की तलाश कर रहे हैं, जिनमें अनुपातिक अंतर है। इनमें ज्यादातर लड़कियां मध्यम वर्गीय परिवार की हैं। जिनके अभिभावक तृतीय श्रेणी सरकारी कर्मचारी या बिजनेस से जुड़े हैं। मुसलिम लड़कियों ने एमबीबीएस, बीटेक, बीफार्मा, फिजियोथिरेपी, फैशन डिजाइनिंग, बीएड, एमबीए और एमसीए, एलएलबी को कैरियर के रूप में चुना है।

शरई अदालत दारुल कजा के काजी मौलाना इनाम उल्ला ने बताया कि अभिभावकों की तरफ से यह जायज समस्या अब सामने आ रही है, उनकी पढ़ी लिखी और काबिल बेटियों के हिसाब से रिश्ते नहीं मिल रहे हैं। लड़के रोजगार से जुड़े हैं, लेकिन किसी का गैरेज है तो किसी की आटोमोबाइल की दुकान। अकसर मां-बाप सलाह मशविरा के लिए दारुल कजा आते हैं।

महंगी प्रोफेशनल पढ़ाई में अभिभावकों को काफी दिक्कतें आईं। इनमें से कुछ को निगेटिव एरिया के तौर पर चिन्ही़त होने पर लोन नहीं मिला। महंगी कोचिंग होने के कारण घरों में लड़कियों ने प्रवेश परीक्षा की तैयारी की।

- नौबस्ता की शीरी बीटेक, फराह खानम बीटेक, नवाबगंज की बेनिस फैजाबाद से बीटेक कर रही हैं। कुछ लोगों को मेरिट कम मींस वजीफा योजना के तहत फायदा हुआ।
- बेकनगंज की मदनी बहनों ने भी चुनौतियों का सामना कर वकालत में अपनी जड़ें जमाई हैं। नाज मदनी, मुमताज अनवरी और फिरोज अनवरी वकालत कर रही हैं। नाज मदनी ने बताया कि मुसलिम समाज में शिक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ी है। प्रोफेशनल पढ़ाई कर चुकी काबिल लड़कियों के रिश्ते के लिए समाजसेवी संगठनों को आगे आना चाहिए।
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मुस्लिम लड़कियों में साक्षरता दर बढ़ी
अलीगढ़ में मुसलिम लड़कियों की शिक्षा का प्रतिशत दस साल में तेजी से बढ़ा है। अगले छह साल यानी 2015 और उसके बाद मुसलिम लड़कियों का प्रतिशत लड़कों से अधिक हो जाने की संभावना है।
अमुवि में वर्ष 1999 में मुसलिम लड़कियों का प्रतिशत विभिन्न संकायों में 18 से 22 था, जो कि 2009 में बढ़कर 37 से 40 फीसदी तक पहुंच गया है। जिले में मुसलिम लड़कियों के लिए शिक्षा की बुनियाद अमुवि के संस्थापक सर सैयद अहमद खान ने रखी थी। जिसे शेख अब्दुल्ला ने लड़कियों के लिए अब्दुल्ला कालेज की स्थापना कराकर आगे बढ़ाया।

मुसलिम लड़कियों में शिक्षा के लिए संघर्ष अमुवि के रजिस्ट्रार रहे सज्जाद हैदर की पत्नी नाजरे हैदर ने किया। वह खुद पढ़ीं और आसपास की लड़कियों को पढ़ाने के लिए समाज की चुनौतियों को स्वीकार कर संघर्ष करती रहीं। यहां तक कि उन्होंने अपनी बेटी कुर्तल एन हैदर को बढ़ाया नहीं बल्कि प्र यात उर्दू की लेखक बनाया।

हालांकि अमुवि के पीआरओ राहत अबरार ने बताया कि उनके मित्र चर्चा करते हैं कि लड़कियां पढ़ी लिखी होने पर उनकी शादी के लिए लड़के देखने में चुनौती का सामना करना पड़ता है।
धर्मशास्त्र विभाग के शिक्षक डा. मु ती जाहिद ए खान ने बताया कि समाज में पढ़ी-लिखी लड़कियों के लिए लड़के देखने में परेशानी सामने आ रही है।

Thursday, December 31, 2009

नया साल मुबारक


नववर्ष साल 2010

आप सभी को मुबारक हो

Thursday, October 22, 2009

वर्तमान एवं भावी बिजनेस पत्रकारों को एक मंच पर लाने का प्रयास

नमस्कार

आप सभी को सूचित करते हुए हमें हर्ष हो रहा है

हमने गूगल के संयोजन से बिजनेस जर्नलिस्ट्स और विद्यार्थियों के लिए एक बिजनेस ग्रुप बनाया है. आप एक क्लिक पर इसे ज्वाइन कर सकते है. हमारा प्रयोजन ब्यापार पत्रकारिता के शुभेच्छुओं को उनकी आवश्यकता अनुरूप आवश्यक सामग्री उपलब्ध कराना है. आप इस ग्रुप के माध्यम से जानकारियों का आदान-प्रदान भी कर सकते हैं. साथ ही किसी भी प्रकार की दुविधा होने पर हमसे संपर्क करके उसका समाधान पा सकते हैं. उम्मीद है कि हमारे इस प्रयास को सार्थक बनाने में आप हमारा साथ देंगे. अगर आपके पास हमारा आमन्त्रण नहीं पहुंचा है तो हमें नीचे दिए गए नंबरों या ईमेल पर सूचित करें. आपको हमारे ग्रुप का हिस्सा बनाने में हमें खुशी होगी।

-स्कन्द विवेक
9584353012
-गौतम
9981596647

Monday, October 12, 2009

फ्रेंड्स विद वेनिफिट्स

पोस्ट से पहले में .... एक बार फ़िर ... बहस वाला ब्लॉग ... उल्टा तीर


उल्टा तीर पर महीने भर के लिए जारी है बहस .... फ्रेंड्स विद वेनिफिट्स पर ...

क्या है
फ्रेंड्स विद वेनिफिट्स क्या आपके है इसका कोई अनुभव तो बांटे ....


फ्रेंड्स विद वेनिफिट्स को युवा वर्ग, वह वर्ग जिसकी ये जरूरत है स्वीकार चुका है क्योंकि समाज में एक बहुत बड़ा वर्ग आज प्रत्येक कार्य के ऊपर सेक्स को महत्व दे रहा है।


इस तरह के रिश्तों के बारे में जो अधिकतर अभी तक महानगरों में है पर देर सवेर इनका असर छोटे शहरों पर भी दिखने लगेगा इसमें कोई अतिशयोक्ति नही है। क्योंकि लोग अपनी सहूलियत के लिए मिसाल ढूंढ लेते है कि वो भी तो ऎसा कर रहा फिर हम क्यों नही करे क्योंकि संस्कृति कैसी भी हो कही न कही उसका स्थान्तरण दूसरे स्थानों पर भी हो ही जाता है।


इस रिश्ते में महिलाओं की अपेक्षा पुरुष वर्ग की संलग्नता थोडी सी ज्यादा है। इसमें पुरुष वर्ग लाभीय केंदित महिला वर्ग की अपेक्षा अधिक होता है वहीं महिला अधिकांशतः मित्रवत केन्द्रित होती हैं। इसमें कोई आर्श्चय नहीं है कि इस सम्बन्ध के दोनों वर्ग महिला व पुरुष मानते हैं कि बिना प्रेम के शारीरिक सम्बन्ध होना असहज नहीं है.


इस तरह के रिश्ते में अगर आपके पास हैं अपने अनुभव या है कोई आपका मित्र, जानकार जुड़ा हुआ है इस रिश्ते में तो हमें लिख भेजिए! [उल्टा तीर]

Monday, September 21, 2009

दुष्यंत कुमार पर डाक टिकट कुमार जारी होगा

हो गई पीर परबत- सी पिघलनी चाहिए
इस हिमालय से कोई गंगा निकालनी चाहिए

आज ये दीवार परदों की तरह हिलने लगी
शर्त लेकिन थी की बुनियाद हिलनी चाहिए

हर सड़क पर, हर गली में, हर नगर, हर गाँव में
हाथ लहराते हुए हर लाश चलनी चाहिए

सिर्फ हंगामा खडा करना मेरा मकसद नहीं
मेरी कोशिश ये है की ये सूरत बदलनी चाहिए

मेरे सीने में नहीं तो तेरे सीने में सही
हो कहीं भी आग लेकिन आग जलनी चाहिए

दुष्यंत कुमार स्मारक डाक टिकट जारी करेंगे राज्यपाल

हिन्दी गजल को नया तेवर और ताजगी प्रदान करने वाले मध्यप्रदेश के साहित्यकार दिवंगत दुष्यंत कुमार के सम्मान में भारतीय डाक विभाग स्मारक डाक टिकट जारी करने जा रहा है। मध्यप्रदेश के राज्यपाल रामेश्वर ठाकुर २७ सितम्बर को माधवराव सप्रे स्मृति समाचार पत्र संग्रहालय एवं शोध संस्थान में एक समारोह में दुष्यंत कुमार स्मारक डाक टिकट जारी करेंगे। इस मौके पर दुष्यंत रचनावली के संपादक डा. विजय बहादुर सिंह तथा पूर्व कुलपति प्रो. धनंजय वर्मा दुष्यंत के व्यक्तित्व और कृतित्व पर व्याख्यान देंगे।

http://sangrahalay.blogspot.com/


‘मैं बेकरार हूं आवाज में असर के लिए’

परदे के पीछे मशहूर कवि और शायर दुष्यंत कुमार का 75वां जन्मोत्सव एक सितंबर 2007 से 31 अगस्त 2008 तक मनाया जाएगा। भोपाल में आयोजक ने बताया कि इस दौरान वर्ष भर व्याख्यान, कवि सम्मेलन और मुशायरों का आयोजन होगा। आज बाजार की ताकतों के कारण आए सामाजिक परिवर्तनों पर दुष्यंत कुमार किस तरह लिखते, इस बात की कल्पना मात्र से रोंगटे खड़े हो जाते हैं। उनके जैसी विलक्षण प्रतिभा के लिए इस कालखंड में लिखना अत्यंत महत्वपूर्ण होता, क्योंकि विसंगतियों और विरोधाभास के इस दौर को वे बेहतर ढंग से प्रस्तुत करते, साथ ही उनके नजरिए से मौजूदा दौर को देखना एक विरल अनुभव होता। इसका यह अर्थ कतई नहीं है कि उनकी रचनाएं आउटडेटेड हो गईं हैं। उनकी रचनाएं आज भी सार्थक हैं और कल भी महत्वपूर्ण साबित होंगी।.......

Saturday, May 30, 2009

आज दिल कहता है हर बात कह दूं ,

आज दिल कहता है हर बात कह दूं,
वो दिन कह दूं, वो रात कह दूं,

आज दिल कहता है हर बात कह दूं

तुम्हें देखें हुए अर्सा हो गया है ,
दिल कहता है हाँ यही बात कह दूं,

आज दिल कहता है हर बात कह दूं

तुम होती तो कुछ ना कहता
बस इसलिए आज ये बात कह दूं

आज दिल कहता है हर बात कह दूं