#sb_456 (A)
*_मध्य भारतिय पवार समाज के गौरव_*
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● *_पद्मभुषन डॉ. हेमेंद्रसिंहजी पंवार_-* Padmabhushan Dr. Hemendra Sigh Pawar, 1st Conservator of Forest and international wild life consultant to govt. of Shreelanka.
● *_डॉ. किरन बिसेन -_* 1st Lady IFS Officer of Pawar Community.
● *_श्रिमती. निलम बुवाडे -_* Neelamji is selected after successful complition of 2 terms at VIA (vidarbha industriel association) as Hon Secretary and she is star performer of New York Life Insurance.
● *_कॅप्टन के. के. बिसेन -_* Achieved highest post from Sep. to Hon. Captain
● *_रविंद्रजी राहांगडाले -_* managing director at Pennsylvania Transformer Technology, Inc. north Carolina USA
● *_गौरिशंकरजी बिसेन -_* Hon Cabinet Minister Govt Of Madhaya Pradesh.
● *_डॉ. धनपालजी टेंभरे -_* 1st Ph D in Mathematics and Executive Council Member, Nagpur University.
● *_डॉ. ज्ञानेश्वरजी टेंभरे -_* International Scientist in Zoology & Ex Dean Faculty of Science, Nagpur University. Ex. President, Rashtriya Pawar Chatriya Mahasabha
● *_डॉ. गौरिशंकर टेंभरे -_* Principal & Secretary and Known Scientist of Chemistry.
● *_इंजी. टिकेश्वरदयाल बिसेन -_* Chief Engineer, Chattisgarh Dept. of Health & Publ. Ex.President, Rashtriya Pawar Chatriya Mahasabha.
● *_श्रिमती. डॉ. रागिनी सि. पारधी -_* M. D. Mitali Nursing & Critical Care Hospital balaghat. 1st Critical Care Unit & Hospital Owner.
● *_डॉ. बि. एम. शरनागत -_* Ayushyaman Hospital & ICCU Unit. President Rashtriya pawar kshtriya Mahasabha.
● *_डॉ. शुरेसजी कटरे -_* Secretary & Director, Ayurvedic College.
● *_विशाल राहांगडालेजी -*_Chief Information Officer. (kajakisthan& maleshiya)
● *_रवी रानाजी -_* President, Yuva Swabhiman & M L A Maharashtra, at the age of 28th. He is CEO of Rana Group.
● *_कन्हैयालालजी बुवाडे -_* Active Senior Citizen & President Rashtriya rajabhoj smarak samiti
● *_प्रोफेसर एच. एच. पारधी -_* 1st daily marathi news paper of a successful media parson. (Owner of Daily News Paper Lokjan)
● *_जयपालसिंहजी पटले -_* Senior Powari Writer/Free Marriage Bureau & Ex- Mahasachiv Rashtriya Chatriya Pawar Mahasabha, Founder of Pawari Boli Bachao Abhiyan, Publisher of Pawar Gatha, Pawari Gram Geeta.
● *_अनिलजी डोंगरदिये -_* Founder Director for Infobits Software Solution.
● *_परिष देशमुखजी -_* Selected Officer in Indian Administrative Services, Proud 279th rank All India & 14t in Maharashtra Selection 2010
● *_सौरभजी पारधी-_* Seclected in Indian Administrative Services, Proud 133rd All India & 3rd in Maharashtra selection 2010
● *_अर्पितजी हरिनखेडे -_* Manager (Expansion) IMS- Mumbai, CAT 2007- 99.71%. Got all IIM calls (Ahmedabad, Calcutta, Lukhnow, Indore, Kozhikote, Bangalore) by securing 99.71 percentile in CAT 2007. Did MBA from MDI Gurgaon (Among Top 5 in India) in Marketing and Information Management. Currently working as Manager (Expansion) in
● *_श्री ढोलेजी -_* Scientist-B (Class-I,Gazetted Officer) in DRDO, Shri Dhole did diploma in Chem.Engg from Govt Poly.Arvi and graduated in 2006 from UDCT, Amravati University, Amravati with a B.Tech (Chem.Tech) .He subsequently completed master degree from L.I.T., Nagpur University, Nagpur in 2008 with a M.Tech.
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✍ *_सोनू भगत_* ✍
*_अखिल भारतिय पवार गर्जना ABPG_*
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Saturday, December 3, 2016
पवार समाज के गौरव
Friday, December 2, 2016
दैनिक भास्कर रायपुर में प्रकाशित खबरें : नोटबंदी पर विभूति की कविताएं
दैनिक भास्कर रायपुर में प्रकाशित खबरें : राजीव सिंह
Sunday, November 27, 2016
युवा कवयित्री विभूति की नोटबंदी पर कविताएं- 2
कालेधन को सफेद बनाने के जुगाड़ पर लिखी
ये कविता...
जुगाड़ ही लगाना है तो सही जगह लगाओ
जुगाड़ ही लगाना है तो सही जगह लगाओ
आम आदमी की तकलीफ देखी नहीं जा रही
तो उठो मदद के लिए हाथ आगे बढाओ
![]() |
| युवा कवयित्री विभूति दुग्गड़ मुथा |
ये डर है जो दिख रहा है
गुस्सा दिखा के अंदर कोने में छुप
रहा है
आप जानते है जो लाइन अभी शुरू हुई है
वो ख़तम नहीं होगी
आप अच्छी तरह जानते हैं ये लाइन यहां
खत्म नहीं होगी
अब जो बदलाव की हवा चली है वो
अपना रुख नहीं बदलेगी
कौन सा डर है जो छुपा रहे हो
अराजकता कह कर अंदर
कौन सी चिंता है जो दबा रहे हो
नेता डर रहा है धन कैसे बनाएगा
इलेक्शन में भीड़ कैसे जुटाएगा
बाबू डर रहा है ऊपर की इनकम कैसे
कमाएगा
बिज़नेसमैन डर रहा है टैक्स कैसे
बचाएगा
आतंकवादी डर रहा है
दहशत कैसे फैलाएगा
ये क्या कम है कि वादी में आज शांति
है
पत्थर फेंकने वालों के मन में अशांति
है
हम एनआरआई लोग जब दूसरे देशों में
रहने जाते हैं
लाइनों में खड़े होकर ही कह जाते हैं
अपने देश में होते तो जुगाड़ लगा
लेते
ले देके काम निकलवा लेते
अब डर है घर जाके भी लाइन में खड़े
होना होगा
सालों की आदत को अब बदलना होगा
जुगाड़ ही लगाना है ना
तो सही जगह लगओ
आम आदमी की तकलीफ देखी नहीं जा रही
तो मदद के लिए हाथ आगे बढाओ
कुछ करना है तो हल बताओ,
दुखती रग को और मत दबाओ
फिर वही हाल है
ब्लैम गेम का सारा धमाल है
नेता चिल्ला रहा है रोलबैक- रोलबैक
आम आदमी तिलमिला रहा है-नीड कैश, नीड कैश
काश एक स्कीम होती
50 दिन बार्टर एक्सचेंज की थीम होती
बर्तन के बदले सब्ज़ी
सब्ज़ी के बदले चावल
फिर कहां है कैश का सवाल
सोचो ऐसे कितने आइडियाज होंगे
50 दिन यूं ही कैश के बिना निकल जाएंगे
जुगाड़ ही लगाना है ना तो सोलूशन्स
बताओ
आम आदमी की तकलीफ देखी नहीं जा रही
तो उठो मदद के लिए हाथ आगे बढ़ाओ
जिसके पास ग्रॉसरी है
कुछ दिन सस्ती बेच दो
उधार के नए अकाउंट खोल दो
जो पैसे नहीं दे पा रहा
उसे 50 दिन का टाइम दे दो
धार्मिक स्थलों में ढेरों चिल्लर है
छोटे-छोटे नोट पेटियों में बंद हैं
चाहो तो उन्हें गरीबों में बंटवा दो
छोटे दुकानदारों को दिलवा दो
कुछ करना है तो सोलूशन्स बताओ
जुगाड़ लगाना है तो सही जगह लगाओ
सुना है बंगलूरू में कोई फ्री
पिज़्ज़ा बांट रहा है
पंजाब में लाइन पे खड़े लोगों को चाय
पिला रहा है
बॉम्बे में चना बांट रहा है
ऐसी बातें न्यूज़ चैनल वाले कभी तो
दिखाओ
हर सिक्के के दो पहलू होते हैं
दिखाना है तो दोनों तरफ दिखाओ
अपना उल्लू सीधा करने के लिए न्यूज़
चैनल मत चलाओ
जुगाड़ ही लगाना है ना तो सही जगह लगाऒ
आम आदमी की तकलीफ देखी नहीं जा रही
तो मदद के लिए हाथ आगे बढ़ाओ
विभूति दुग्गड़ मुथा
https://www.facebook.com/poetrywithpurposebyvibhuti/
विभूति का सवाल : देश बदल रहा है, आप कब बदलोगे...
| युवा कवयित्री विभूति दुग्गड़ मुथा |
- दुबई में रह रहीं रायपुर की युवा कवयित्री विभूति मुथा की कविताओं ने लोगों के दिलों को छुआ
- लोगों ने कविताओं के वीडियो को वाट्सएप, फेसबुक और यूट्यूब पर खूब शेयर किया
रायपुर। नोटबंदी के पक्ष में सोशल
मीडिया पर कई कविताएं काफी वायरल हो रही हैं। इनमें से कुछ कविताएं हमारे शहर की
मूल निवासी युवा कवयित्री विभूति दुग्गड़ मुथा की भी हैं। उनकी ज्यादातर कविताएं
अभी वीडियो के रूप में ही मौजूद हैं। देशभर में सबसे ज्यादा शेयर हो रही उनकी
कविता, बदलाव भी चाहते हैं और बदलना भी नहीं चाहते...को अब तक डेढ़ लाख से ज्यादा लोगों ने
देखा है। उनके यूट्यूब चैनल और फेसबुक पेज से लोग वीडियो डाउनलोड करके शेयर कर रहे
हैं।
केंद्र सरकार के विमुद्रीकरण के
फैसले को लेकर लोगों में उम्मीद जगाने वाली इन कविताओं ने लोगों के दिलों को छू
लिया है। उनकी कुछ कविताओं की बानगी देखिए- जुगाड़ लगाना है तो सही जगह लगाओ, क्या-क्या बंद करोगे, लोगों की आवाज
कैसे बंद करोगे, नहीं मैं नेता नहीं बनना चाहती, देश बदल रहा है, आप कब बदलोगे....।
छत्त्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में कलेक्टोरेट के पीछे स्थित रविनगर
निवासी समाजसेवी विजय दुग्गड़ और साधना दुग्गड़ की बेटी विभूति इन दिनों दुबई में
रहती हैं। मोटिवेशनल ट्रेनर विभूति बताती हैं कि 8 नवंबर को प्रधानमंत्री मोदी ने जब इस
फैसले का ऐलान किया तो देशभर में काफी चर्चाएं होने लगीं। इनमें दोनों तरफ से
लोगों की प्रतिक्रिया आ रही थी। मुझे लगा कि पहली बार हमारे देश में किसी नेता ने
इस दिशा में गंभीरतापूर्वक सोचा है। तब मैंने 12 नवंबर को इस पर पहली कविता लिखी- बदलाव भी चाहते हो
और बदलना भी नहीं चाहते... इस कविता को हजारों लोगों ने पसंद किया। मेरे फेसबुक पेज और
यूट्यूब चैनल पर लोगों के काफी अच्छे कमेंट्स आए। इसके बाद मैंने कई कविताएं
लिखीं।
बुजुर्ग सीए ने फोन करके आशीर्वाद दिया
विभूति ने बताया कि उनसे देश के कई
शहरों से लोग संपर्क कर रहे हैं। अहमदाबाद के एक बुजुर्ग सीए ने उन्हें फोन करके
कहा कि बिटिया आपकी कविता ने मुझे झकझोर दिया है। आप लोगों को प्रेरित कर रही हैं।
मेरी शुभकामनाएं और आशीर्वाद आपके साथ है। वे कहती हैं कि अहमदाबाद, हैदराबाद, बेंगलूरू, जयपुर, रायपुर, मुंबई, दिल्ली, चेन्नई,वडोदरा से लोग वाट्सएप के स्क्रीनशॉट
टैग कर रहे हैं। फेसबुक मैसेंजर पर भेज रहे हैं।
बेटी ने देश के लिए लिखा, बहुत खुश हूं
विभूति के पिता विजय दुग्गड़ कहते हैं, बेटी ने दुबई में
रहकर भी देश के माहौल को लेकर सोचा और अच्छी कविताएं लिखीं, मैं बहुत खुश हूं।
हमें गर्व है। मैंने विभूति का वीडिया अपने मित्रों को भी भेजा है, सभी उसे पसंद कर
रहे हैं।
2004 से लिख रहीं कविताएं
मोटिवेशनल कविताओं के सफर के बारे
में विभूति ने बताया कि उन्होंने 2004 से कविताएं लिखना शुरू किया। इसकी प्रेरणा उन्हें अपने कॉलेज में
एक सहपाठी से मिली। उनके यूट्यूब चैनल को 2 हजार 62 लोगों ने सब्सक्राइब किया है। बदलाव
वाली कविता को डेढ़ लाख से ज्यादा पेज व्यू मिले हैं। वहीं, जुगाड़ वाली कविता
को अब 50 हजार लोगों ने
पसंद किया है।
- यूट्यूब चैनल को 2062 लोगों ने सब्सक्राइब किया है।
- बदलाव वाली कविता को डेढ़ लाख से ज्यादा पेज व्यू मिले है।
- जुगाड़ वाली कविता को अब 50 हजार लोगों ने पसंद किया है।
- सभी कविताओं को अब तक चार लाख से ज्यादा लाइक-कमेंट्स।
https://www.facebook.com/poetrywithpurposebyvibhuti/
दैनिक भास्कर रायपुर में रामकृष्ण डोंगरे की रिपोर्ट, 27 नवंबर, 2016
युवा कवयित्री विभूति दुग्गड़ मुथा की नोटबंदी पर कविताएं : 1
| युवा कवयित्री विभूति दुग्गड़ मुथा |
बदलाव भी चाहते हैं और बदलना भी नहीं
चाहते
ये कैसी चाहत है,
सालों के बाद एक नेता आया
जो बोला, वो कर दिखाया
125 करोड़ लोग हैं 125 नहीं
हां, तो मैं क्या कह रही थी
सालों बाद एक नेता आया जो बोला वो कर
दिखाया
देश तो ठीक ही था 60 साल पहले भी
लोग बदल जाते तो बात होती
खुद को सम्मान दो तो सम्मान मिलेगा
गलत को सही बता के कब तक खोटा सिक्का
चलेगा
चलता है थोड़ा बहुत ऊपर नीचे
चला लेंगे कुछ ले देके
आदत सी पड़ गई थी काले धन की
ऊपर की इनकम की
झटका मिला देश हिला
पर अब भी सब परेशां हैं
सफाई की कीमत दे के
सब हैरां हैं
न चाहते हुए भी धन जला रहे हैं लोग
नोटों की गड्डियां गंगा में बहा रहे
हैं लोग
बदलाव भी चाहते हैं
और बदलना भी नहीं चाहते, ये कैसी चाहत है
मन नहीं, मानसिकता बदलनी
होगी
बदलाव की कीमत हमें भी कुछ तो चुकानी
होगी
(भारतीय मूल की दुबई निवासी युवा कवयित्री की कविता के संपादित अंश)
Monday, October 24, 2016
किस्सा तीन तलाक का- 1
तीन
तलाक के ताजा मामले को समझने
के लिए तहलका की यह रिपोर्ट
आपके लिए काफी है। अगर तीन
तलाक....जैसी कुप्रथा
को और समझना है तो आप कुरान
में उसका सही रूप पढ़ लीजिए।
लेकिन होता कुछ और ही है।
हिंदू धर्म में विधवाओं की संख्या प्रति 1000 88.3, मुसलमानों में 72 है। जबकि अलग रहने वाले महिलाओं की संख्या हिंदुओं में प्रति 1000 पर 5.5 तो मुसलमानों में 4.8 है। वहीं तलाक के आंकड़ों पर नजर डालें तो हिंदुओं में प्रति 1000 यह 1.8 तो मुसलमानों में यह 3.4 है।
धर्म
पहले नहीं है। इंसान या इंसानियत
पहले हैं। इंसान पहले आया।
धर्म बाद में। धर्म ने इंसान
को नहीं बनाया। इंसानों की
शुरुआती बिरादरी ने ही अपने
लिए अलग-अलग धर्म
बनाए। कुप्रथाएं किसी भी धर्म
या सम्प्रदाय में हो। खत्म
होनी चाहिए। भारत में अगर सती
प्रथा, बाल विवाह
जैसी बुराइयों को खत्म किया
गया है। तो मुस्लिम धर्म की
तीन तलाक जैसी प्रथा-कुप्रथा
को भी खत्म किया जाना चाहिए।
अगर
मेरे परिवार में, मेरे
परिचितों में महिलाओं के साथ,
बच्चों के साथ कोई
अन्याय-मारपीट नहीं
हो रही है। तो मैं दावे के साथ
ऐसा कैसे कह सकता हूं कि दुनिया
की सारी महिलाओं के साथ कोई
जुल्म नहीं हो रहा है। इसलिए
पढ़े-लिखे मुस्लिम
तबके को यह सोचना छोड़ देना
चाहिए कि तीन तलाक सही है।
क्योंकि उनकी जानकारी या उनके
परिचितों में किसी के साथ कोई
गलत नहीं हुआ है। तीन तलाक पर
बैन लगने से उनका धर्म खतरे
में नहीं पड़ जाएगा।
देशभर
में देखिए... अपनी
आंखें खोलिए...किस-किस
तरह से... कितनी
मुस्लिम औरतों को तीन तलाक
का अभिशाप झेलना पड़ रहा है।
देश
में अगर कोई कानून है तो सब
कुछ कानून के मुताबिक ही होना
चाहिए। सुप्रीम कोर्ट या सरकार
अगर कोई कदम उठाएगी तो किसी
की सुनी- सुनाई बातों
के आधार पर नहीं। उनके सामने
तमाम उदाहरण है....रोती...बिलखती
औरतों की जिंदा कहानियां है
जो उन मुर्दा सोच वाले लोगों
की वजह से ऐसी जिंदगी जी रही
है। चाहे फिर वह औरत शायरा
बानो, फातिमा,
नायरा या कुछ भी....
आप
भी पढ़िए इस रिपोर्ट को फिर
अपनी राय रखिए... स्वागत
है। बिना पढ़े या गुस्से में
कोई टिप्प्णी न ही कीजिए तो
बेहतर रहेगा....
#teentalaq
कुछ तथ्य
कुछ तथ्य
नवंबर, 2015 में भारतीय मुस्लिम महिला आंदोलन (बीएमएमए) नाम की संस्था ने एक सर्वे जारी किया. सर्वे में देश के दस राज्यों की तलाकशुदा करीब पांच हजार औरतों से बात की गई. सर्वे में तलाक के तरीके, उनके साथ हुई शारीरिक-मानसिक हिंसा, मेहर की रकम, निकाहनामा, बहुविवाह जैसे कई मुद्दों पर खुलकर बात हुई. जो नतीजे आए, वे बेहद चौंकाने वाले थे. रिपोर्ट में कहा गया कि 92.1 प्रतिशत महिलाओं ने जुबानी या एकतरफा तलाक को गैरकानूनी घोषित करने की मांग की. वहीं 91.7 फीसदी महिलाएं बहुविवाह के खिलाफ हैं. 83.3 प्रतिशत महिलाओं ने माना कि मुस्लिम महिलाओं को न्याय दिलाने के लिए मुस्लिम फैमिली लॉ में सुधार करने की जरूरत है.
तीन तलाक को लेकर शायरा बानो के सुप्रीम कोर्ट जाने के बाद देश में भी तीन तलाक की व्यवस्था को खत्म करने की आवाज तेज होने लगी है. इसके खिलाफ एक ऑनलाइन याचिका पर करीब 50,000 मुस्लिम महिलाओं ने हस्ताक्षर किए हैं. हस्ताक्षर करने वाले लोगों में बड़ी संख्या में मुस्लिम पुरुष भी शामिल थे. याचिकाकर्ता बीएमएमए चाहता है कि राष्ट्रीय महिला आयोग इसमें हस्तक्षेप करे. बीएमएमए ने महिला आयोग की अध्यक्ष ललिता कुमारमंगलम को लिखे पत्र में कहा कि उसने अपने अभियान के पक्ष में 50,000 से अधिक हस्ताक्षर लिए हैं. हमने यह पाया है कि महिलाएं जुबानी-एकतरफा तलाक की व्यवस्था पर पाबंदी चाहती हैं.
‘सीकिंग जस्टिस विदिन फैमिली’ नामक हमारे अध्ययन में पाया गया कि 92 फीसदी मुस्लिम महिलाएं तलाक की इस व्यवस्था पर पाबंदी चाहती हैं. इस मामले में ललिता कुमारमंगलम का कहना है कि आयोग सुप्रीम कोर्ट में शायरा बानो के मुकदमे का समर्थन करेगा. उनका कहना है, ‘राष्ट्रीय महिला आयोग पहले से ही इस मुकदमे का हिस्सा है. हम इस महीने सुप्रीम कोर्ट में अपना जवाब दाखिल करेंगे. इस मांग का 200 फीसदी समर्थन करते हैं. जो भी बन पड़ेगा, हम करेंगे.’
http://tehelkahindi.com/an-elaborated-report-on-triple-talaq-and-how-muslim-women-are-standing-against-it/
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