Thursday, April 5, 2018

सोशल मीडिया : नजर है आप पर

मित्रों, देखा जा रहा है कि वर्तमान में कई अनर्गल भड़काऊ मैसेज सोशल मीडिया, व्हॉट्सऐप आदि पर वायरल किए जा रहे हैं।

        यह ऐसे मैसेज यदि पर्सनल पर मिले तो सबसे पहले, पहला प्रश्न खुद से करें कि *"यह मेरे पास क्यों आया है ?"*

        और… यदि ग्रूप में आता है तो आपका प्रश्न खुद से यह होना चाहिए कि *"इसे ग्रूप में किसने और क्यों भेजा है ?"* भेजने वाले को आप कितना जानते पहचानते हैं, अनजान है तो उससे परिचय लेकर और जानकार है तो तब भी, इस अनर्गल भड़काऊ मैसेज का सोर्स source पूछते हुए पोस्ट करने का जायज कारण प्रेमपूर्वक पूछें।

       *विश्वास करिए, जब उपरोक्त विचार पर आपका ध्यान होगा, तत्सामयिक आकस्मिक उद्वेलन आपका शांत रहेगा अर्थात ऐसी ग़ुस्सा दिलाने वाली पोस्ट पढ़कर भी आपको ग़ुस्सा नहीं आएगा।*

        यह निम्न संकेत
```          🦅👁          ```
        हमेशा दिमाग़ में रखें कि कई राजनैतिक षड़यंत्रकारियों की *"गिद्ध नज़र"* आप पर बनी हुई है।

        वह ऐसे मैसेज जानबूझकर वायरल करवाना चाहते हैं और गिद्ध निगाह से विवेचना कर रहे हो सकते हैं कि कौनसे किन समाचारों से कितने बेवक़ूफ़ भड़क रहे हैं।

        आपको पता भी नहीं चलेगा, *आप बेवक़ूफ़ों की गिनती में गिने गये हैं।*

        आपको पता ही है कि अगले वर्ष *2019* में मतदान होने हैं। राजनीतिक षड़यंत्र किन्हीं घिनौने कृत्य को अंजाम देने की साज़िश की तैयारी जोरों पर हो रही हो सकती है।

        कई साज़िश-सहयोगियों को देश के बेवक़ूफ़ों की गिनती करने की ज़िम्मेदारी सौंपी गयी हो सकती है। यह सब भी शायद इसी के तहत हो रहा हो सकता है।

        एक औचित्यहीन मैसेज एक बार जारी होने के बाद, कितने लोगों द्वारा कितनी बार कॉपी/पेस्ट या फ़ॉर्वर्ड किए जाकर वायरल होता है और इसकी प्रतिक्रिया में कौन किस प्रकार की भाषा का इस्तेमाल करता है। यह सब देखने के लिए कई *गिद्ध निगाहें* ऐक्शन/रीएक्शन पर नज़र रख बेवक़ूफ़ों के आँकड़े तैयार कर रही हो सकती हैं।

        और उनके आला अफ़सरान, साज़िश रचयिता संगठन अपनी तैयारियों का आँकलन कर रहे हो सकते हैं।

        *अपनी और अपनों की सुरक्षा हमारी निजी ज़िम्मेदारी भी है। यदि मेरे तर्क में कोई सच्चाई महसूस हो तो संकेत*
```          "🦅👁"          ```
*याद कर लें और उद्वेलित करने, भड़काने, ग़ुस्सा दिलाने आदि वाले सभी प्राप्त गुस्ताख़ मैसेज को तुरंत ही डिलीट कर दें और अपनी तरफ़ से कोई प्रतिक्रिया नहीं दें। प्रारंभिक पैराओं में दिए खुद से पूछने वाले प्रश्न भी ध्यान में रखेंगे तो तुरंत ग़ुस्सा भी नहीं आएगा।*

        है न दोहरा फ़ायदा :-```
  1. ``` ग़ुस्से पर कंट्रोल```
  2. ``` बेवक़ूफ़ों की गिनती में शामिलता से बचाव

        सहमत हैं तो अपने अपनों को जागरूक करने यह शेयर कर सकते हैं```।

```
(लेखक रमेश बालानी पुराना राजेंद्र नगर, रायपुर में रहते हैं। और सोशल मीडिया पर पैनी नजर रखते हुए लोगों को जागरूक करने के लिए पोस्ट लिखते हैं।)


Tuesday, April 3, 2018

सोशल मीडिया पोस्ट : जरा सोचिए, रुकिए और गूगल कीजिए

सोशल मीडिया ने वैसे तो कई आंदोलन खड़े कर दिए। कई बदलाव भी ला दिए है। मगर दूसरी तरफ नफरत के बीज बोने में भी सबसे आगे हैं। ताजा उदाहरण एससी-एसटी एक्ट में बदलाव के विरोध में आयोजित भारत बंद का है। जहां दर्जनों फेक तस्वीरें वायरल हो रही है।

नफरत फैलाने के लिए लोगों का खास हथियार है- फर्जी तस्वीरें, फेक पोस्ट। जिसे आम आदमी सच मान लेता है। आंख मूंदकर भरोसा कर लेता है।

गूगल पर सर्च करके सच जानने की जरा भी कोशिश नहीं करता है। कहेगा टाइम किसके पास। मगर घंटों फेसबुक या यूट्यूब पर टाइम बर्बाद कर देगा।

गूगल करने में एक से दो मिनट लगेंगे। सारी सचाई खुद ब खुद आपके सामने आ जाएगा। नफरत की आग भड़काने या फैलाने से पहले जरा सोचिए। रुकिए। और गूगल कीजिए...

तय आपको करना है...
आग फैलाना चाहते हो...
या आग बुझाना चाहते हो...

*पोस्ट अच्छी लगे तो ज्यादा से  ज्यादा शेयर कीजिए।*

https://www.altnews.in/hindi/fake-photo-of-attack-on-police-sub-inspector-viral-on-social-media/


Friday, March 2, 2018

पत्रकार की होली

लाइव से एडिट तक
इनपुट से आउटपुट तक
न्यूज में प्रोग्राम में
गेस्ट के तामझाम में
डेस्क से रिपोर्टर तक
असाइनमेंट से स्ट्रिंगर तक
एंकर के टॉकबैक पे
स्क्रिप्ट की चिकचिक पे
पीसीआर रन डाउन पे
सर्वर ब्रेकडाउन पे
बाइट में देरी पर
टीआरपी हेराफेरी पर
गुस्से में हुए लाल
न्यूज रुम में बवाल
तमतमाए चेहरे बेरंग
शिकायती लहजे बदरंग
एक्शन पे रीएक्शन
शाबाशी का टशन
बैकबाइटिंग के दौर में
कांपीटिशन के जो़र में
किसी का क्रेडिट खा गए
किसी की बैंड बजा गए
अपनी गलती दूसरों पे ठोंकी
सिगरेट पे सिगरेट झोंकी
कभी उसने तो कभी हमने
फ्रस्टेशन निकाला
टेंशन का हरेक रंग
एक दूसरे पे डाला
किसी ने लकड़ी टिकाई
तो किसी ने आग लगाई
इसी तरह हमने
साल भर होली मनाई .

( *रचनाकार* - *भूपेंद्र सोनी "शजर"*)
*भूपेंद्र सोनी टीवी पत्रकार है*


Monday, February 26, 2018

श्रद्धांजलि सूची से क्यों हटा श्रीदेवी का नाम...

मध्यप्रदेश विधानसभा की श्रद्धांजलि सूची से क्यों हटा श्रीदेवी का नाम...

किसी की मौत कैसे पहेली बन जाती है। हम अपने आसपास देखते ही है। श्रीदेवी की मौत इसका ताजा उदाहरण है।

अभी मौत का सच सामने नहीं आया है। कभी डूबने से। कभी हार्ट अटैक से। कभी शराब पीने से मौत हुई कहा जा रहा है। अब भाजपा नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने हत्या की आशंका जताई है।

कुछ लोग (अमर सिंह) कह रहे वे इतनी शराब नहीं पीती थी। संजय कपूर ने कहा- उन्हें हार्ट अटैक की बीमारी नहीं थी। तो फिर सच क्या है।

क्या इन सब बातों के अचानक सामने से एक अभिनेत्री या कलाकार का सम्मान खत्म हो जाता है। आदमी की प्रोफेशनल लाइफ का हमें सम्मान करना चाहिए। कद्र करनी चाहिए। न कि उसकी पर्सनल लाइफ की कुछ बातों को लेकर 50 साल के कलाकारी जीवन को डूबो देना चाहिए।

कुछ लोगों को अगर लगता है कि सिनेमा कि दुनिया बहुत आसान है तो वह समझ ले कि दुनिया का कोई भी काम आसान नहीं होता. एक्टिंग. सिंगिंग. म्यूजिक. या और कुछ भी. हर काम एक साधना है. एक तपस्या है जिसमें तनाव भी होता है. हमें किसी भी व्यक्ति के काम की तारीफ करनी चाहिए. ना कि उसे नकार देना चाहिए.

श्रीदेवी की मौत में शराब या अन्य कोई एंगल आने के बाद जिस तरह से लोगों का नजरिया बदला है. वह हम भारतीयों की की बहुत ही गलत मानसिकता है. इस कड़ी में मध्यप्रदेश विधानसभा में दी जाने वाली श्रद्धांजलि सूची से श्रीदेवी का नाम हटाना और भी बड़े सवाल खड़े करता है। बीजेपी के नेताओं ने आखिरी में उनका नाम हटवा दिया था।

#Sridevi #mp


Sunday, February 18, 2018

कुछ आदमी अच्छे होते हैं...

कुछ आदमी अच्छे होते हैं,
कुछ आदमी बुरे होते हैं।

कुछ बिहारी अच्छे होते हैं,
कुछ बिहारी बहुत बुरे होते हैं।
कुछ उड़िया अच्छे होते हैं,
तो कुछ उड़िया बुरे भी होते हैं।

कुछ मध्यप्रदेशी अच्छे होते हैं,
तो कुछ मध्यप्रदेश अच्छे नहीं भी होते हैं।
कुछ यूपी के भैया अच्छे होते हैं,
तो कुछ यूपी वाले बुरे भी होते हैं।

मतलब
बुराई का संबंध किसी जाति-धर्म,
प्रदेश या देश से नहीं है।
ये किसी भी इंसान में हो सकती है।
मगर अपनी बुराई,
अपनी कमियों को छुपाना
या नियंत्रण करना हमें आना चाहिए
और अपनी अच्छाइयों को
दूसरों के सामने और अच्छे से
पेश करना हमें आना चाहिए।

©®रामकृष्ण डोंगरे तृष्णा
रचना समय - 19 फरवरी, 2018


Thursday, February 15, 2018

प्यारे प्यारे कुत्ते के पिल्लों को देखकर हम ठहर गए...







करीब आधा दर्जन छोटे छोटे पिल्ले रायपुर के शहीद स्मारक चौक पर हमें मिले। जो हमारे साथ अचानक घुल मिल गए। शहर में कुछ दिनों पहले कुत्तों के हमले से एक बच्ची की जान चली गई थीं। मगर पागल कुत्तों से आप डर सकते है। उनसे नफरत कर सकते हैं। लेकिन इन प्यारे-प्यारे, छोटे-छोटे पिल्लों से कैसी नफरत। कैसा गुस्सा।

कुछ साल पहले छोटे-छोटे पिल्लों को करीब से देखने का मौका मिला था। अपने गांव में, घर पर। उसके बाद ये दुबारा मौका मिला

मुझे कुत्तों से कभी डर नहीं लगता। मेरा दावा है कि कोई भी कुत्ता मुझे काट नहीं सकता। जब तक कि कुत्ता पागल न हो। कुत्ते को रात में या दिन में हेंडल करने का एक तरीका होता है। अगर आप प्यार से पेश आओगे तो कुत्ते कुछ नहीं करेंगे। अगर रात में कुत्ते या उनका झुंड आपकी तरफ दौड़े तो भागने की जरूरत नहीं है। रुक जाइए। उनसे बात कीजिए वे खुद शांत होकर लौटे जाएंगे। वर्ना आपके पीछे दौड़ते ही रहेंगे। हो सकता है कि काट भी लें।


Monday, February 12, 2018

रोज एक शायरी

दुनिया में जब आप जैसे अच्छे लोग है,
फिर क्यों मैं बुरे लोगों के बारे में सोचूं।

©®रामकृष्ण डोंगरे तृष्णा