Saturday, June 12, 2021

फेसबुक पोस्ट : *इस "सिस्टम" के आगे "मैं" लाचार हूं...*

*इस "सिस्टम" के आगे "मैं" लाचार हूं...*
*मन करता है, मार-मार कर चटनी बना दूं...*

✒️ *ब्लॉगर और पत्रकार रामकृष्ण डोंगरे*

(हर जागरूक नागरिक जल्द से जल्द कोरोना की वैक्सीन लगाना चाहता है। लेकिन सिस्टम की खामी, वैक्सीन स्लॉट बुक करने का टाइम फिक्स नहीं होने के कारण परेशान हो रहा है।) 

दोस्तों, 
इस सिस्टम के आगे मैं लाचार हो गया हूं. 
इस सिस्टम का मैं क्या करूं. 
इस सिस्टम का कोई चेहरा भी नजर नहीं आता। 
अगर यह मेरे सामने आ जाए, 
तो मैं मार-मार कर इसकी चटनी दूं। 
लेकिन मुझे पता नहीं कि यह सिस्टम कौन है। 

*अरे! आप क्या समझे...*

मैं "सीजी टीका" की बात कर रहा हूं। वैक्सीनेशन स्लॉट बुक करने के लिए मैं शाम 5 बजे से लेकर रात 11 बजे तक तो कभी कभी रात 3 बजे तक... इस सिस्टम को रिफ्रेश करते रहता हूं।

कि कभी तो कोरोना टीका लगाने के लिए स्लॉट बुक होगा। लेकिन, नहीं बुक होता। इस सिस्टम ने मुझे लाचार बना दिया है। ये सिस्टम ये भी नहीं बताता कि किस समय वैक्सीन के लिए अप्वाइंटमेंट बुक होगा।

मैं, यहां अकेला मैं नहीं हूं। मैं यहां हर छत्तीसगढ़ वासी है। जो टीका लगाने के लिए स्लॉट बुक करना चाहता है। एक तो वैक्सीन का टोटा, ऊपर से सिस्टम की ऐसी गड़बड़ी की वजह से आनलाइन स्लॉट बुक ही नहीं होता। क्या करें आदमी। 

ऐसा सिस्टम बनाता कौन है और क्यों बनाता है कि आखिर में आम आदमी का सिस्टम से भरोसा उठ जाए। और वो उठ जाए।

©® *ब्लॉगर और पत्रकार रामकृष्ण डोंगरे*

_*नोट : हर छत्तीसगढ़ वासी का दर्द इस पोस्ट में नजर आ रहा है, जो वैक्सीनेशन के लिए स्लॉट बुक कराने की परेशानी झेलता है। कृपया पोस्ट जरूर शेयर कीजिएगा।*_

🙏🙏🙏🙏🙏

Saturday, June 5, 2021

मिलिए बाल वीडियो क्रिएटर बलजीत मिश्रा उर्फ मिल्हू पांडे से

*मोदीजी... 'अगर 7 साल भी स्कूल बंद करना पड़े,*
*तो ये बलिदान हम देंगे.'*....

इन दिनों वायरल एक वीडियो में आप ये प्यारी-सी आवाज जरूर सुन और देख रहे होंगे। 

इस सबसे ज्यादा वायरल वीडियो के दो क्यूट बच्चों में से सबसे छोटे नन्हे कलाकार को आप नहीं जानते होंगे।

... तो मिलिए इस नन्हें कलाकार से।
इनका नाम है मिल्हू पांडे milhu pandey...
इनकी एक पहचान "पूजा का प्रेमी" भी है। पूजा इनकी अॉन स्क्रीन गर्लफ्रेंड है। ये वीडियो सबसे ज्यादा वायरल हुआ थे। इनके वीडियो इंस्टाग्राम, यूट्यूब, फेसबुक से लेकर कई वीडियो एप पर है... सभी जगह Baljeet_mishra_70 या milhu pandey की आईडी से सारे वीडियो मौजूद है।

यूट्यूब पर milhu pandey comedy नामक चैनल है। जहां इनके वीडियो अपलोड किए जाते है। इस चैनल के 52 हजार से ज्यादा सब्सक्राइबर है। 30 अगस्त 2014 को शुरू हुए इस चैनल के 95 लाख से ज्यादा व्यूअर्स है। एक चैनल baljeet mishra 70 नाम से भी है। फेसबुक पर baljeet mishra 70 नाम से पेज है। यहां भी इनके कमाल के वीडियो है। 

उत्‍तर प्रदेश के शामली जिले के एलम कस्‍बे के बाल वीडियो क्रिएटर बलजीत मिश्रा उर्फ मिल्हू पांडे ने वीडियो एप VMate के #GharBaitheBanoLakhpati कैम्पेन में 20,000 का पुरस्कार जीता था। उस दौरान नन्हें कलाकार बलजीत ने अपनी मिठास से भरपूर आवाज़ और खूबसूरत अभिव्‍यक्ति से कॉमेडियन भारती सिंह समेत अन्‍य दर्शकों का दिल जीत लिया था।

ये बच्चा एक प्रोफेशनल कलाकार की तरह डायलॉग बोलता है। वीडियो में शायद पिता या कोई पहचान वाले इन्हें गाइड करता है। 

बचपन से ही इनके वीडियो बनाए जा रहे है। इस बच्चे का एक वीडियो काफी पहले वायरल हुआ था जिसमें फौजी बना बच्चा कहता है - "चाहे तुम हमें जान से मार डालो, लेकिन देश के साथ जो गद्दारी करवाना चाहते हो, वो हरगिज नहीं करेंगे"।

बच्चे में गजब की अभिनय क्षमता है। इस बच्चे को अच्छी ट्रेनिंग दी जाए तो बड़ा होकर अच्छा एक्टर बन सकता है।

©® *रामकृष्ण डोंगरे*, ब्लॉगर और पत्रकार

Thursday, April 22, 2021

|| छोड़ो इन बातों को ||

|| छोड़ो इन बातों को ||

कुछ आदमी तक खरीद लेते है...
कुछ आदमी बिक भी जाते है...

लेकिन छोड़ो, इन बातों को...
मुश्किल दौर है कोरोनाकाल में...

खजाना भी हो आपके पास तो
जरूरत पड़ने पर हास्पिटल में बेड,
वेंटिलेटर, आक्सीजन, इंजेक्शन-दवा
तक नहीं खरीद पाओगे।

...क्योंकि उस वक्त बिकने के लिए
ये सब चीजें उपलब्ध नहीं होगी।

सब खरीदने की हैसियत रखने वाला
आदमी उस वक्त अपनी चंद सांसों के
लिए भी बेबस नजर आता है।

©® *रामकृष्ण डोंगरे तृष्णा*

Thursday, January 28, 2021

किसानआंदोलन2020 : क्या आप किसान परिवार से नहीं हो?

©® पत्रकार और ब्लॉगर रामकृष्ण डोंगरे 
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दिल्ली और किसान आंदोलन… पिछले 2 माह से दिल्ली के आसपास किसानों का आंदोलन चल रहा है. तीन कृषि कानूनों की वापसी को लेकर 27 नवंबर 2020 से चल रहे इस आंदोलन में 26 जनवरी को दिल्ली का घटनाक्रम लोगों के लिए आश्चर्यजनक रहा। एक तरह से किसान आंदोलन से मुंह फेरने जैसा रहा। 

असलियत तो यही है कि देश में किसानों का मुद्दा है और रहेगा और इसे लेकर चल रहा आंदोलन भी सही है। अब बात करते हैं कि 26 जनवरी को दिल्ली में क्या हुआ… 26 जनवरी को दिल्ली में ट्रैक्टर रैली की जो योजना बुजुर्ग किसान नेता ने बनाई थी, उसमें कहीं कोई गड़बड़ी नहीं थी। युवाओं ने, युवा जोश ने उस दिन का माहौल खराब कर दिया। वे रैली निकालने के लिए जल्दबाजी में थे। इसके अलावा तय रूट को छोड़कर अन्य रास्तों से आगे बढ़ना चाहते थे। और किन्हीं 1-2 खुराफाती युवाओं के दिमाग में यह बात आई होगी कि दिल्ली के लाल किले तक चलते हैं. और इस तरह आंदोलन को बिगाड़ने की कोशिश की गई. 

… जैसा कि सभी जानते हैं देश में दो विचारधाराएं काम करती है. एक हमेशा सत्ता पक्ष का सपोर्ट करती है। और दूसरी विपक्ष के साथ खड़ी नजर आती है। सत्ता पक्ष के पास अपना गणित है, वह अपना स्वार्थ देखते हैं. उन्हें हर उस बात से नाराजगी है जो सरकार से सवाल करें या सरकार के खिलाफ बोले। 

वहीं विपक्ष किसानों या आम लोगों के साथ है। जहां तक किसानों का मुद्दा था, ज्यादातर मध्यमवर्ग किसानों के साथ ही है। लेकिन विचारधारा के खूंटे से बंधे कुछ लोग, जो स्वयं देश की सबसे बड़ी आबादी किसान परिवार से आते हैं, बावजूद इसके वे किसानों के साथ खड़े नहीं होना चाहते। 

अब लोग कहते हैं कि जो दिल्ली में किसान आंदोलन चल रहा है, उसमें हमारे यहां का किसान नहीं है तो हम उनके साथ क्यों खड़े हो। तो असलियत सब जानते है कि दिल्ली के किसान आंदोलन में पंजाब, हरियाणा, यूपी और राजस्थान के सबसे ज्यादा किसान हैं। इसकी वजह है दिल्ली के आसपास होना। और बाकी राज्यों के किसानों की तुलना में उनकी मजबूत आर्थिक स्थिति। …क्योंकि इस आंदोलन में बहुत पैसा खर्च हो रहा है। इतना समय और पैसा खर्च करने की हैसियत सच कहे तो मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों के छोटे किसानों में नहीं है। 
2 महीने से जारी किसान आंदोलन में जिस तरह से रोज खबरें आ रही थी, देश का हर नागरिक इसकी तारीफ ही कर रहा था। शांतिपूर्ण ढंग से, बिना किसी शोर-शराबे के किसानों का धरना जारी था। वार्ता चल रही थी। सरकार बातचीत कर रही थी। हां एक बात यह है कि किसान कृषि बिलों की वापसी के अलावा किसी और बात पर तैयार नहीं है। और सरकार भी बिल वापस नहीं करना चाहती। यहीं पर पेंच फंसा हुआ है। इतना सब होने के बाद भी लोग किसान के साथ है और किसान के साथ रहेंगे। 

… गांव से निकलकर शहर में पहुंचने वाला हर कोई शख्स जानता है कि उसके माता-पिता ने उसे शहर क्यों भेजा। गांव में क्या दिक्कत है। किसानों की क्या समस्या है। सब जानते हैं लेकिन भक्त बनकर अपने तथाकथित भगवान के लिए तालियां बजाना, किसे अच्छा नहीं लगता। तो जिसे अच्छा लगता है। वो बजाते रहे। लेकिन सच्चाई यही है कि किसानों की समस्याएं विकराल है। और उसका हल कोई नहीं निकालना चाहता। इसीलिए हमारे किसानों को इतना बड़ा आंदोलन चलाना पड़ रहा है। 
#किसानआंदोलन  #KisanAndolan 

#किसान_आंदोलन_2020_21 #दिल्ली #कृषि_कानून

Wednesday, January 27, 2021

साईं सिमरन सोसाइटी में 72 वें गणतंत्र दिवस पर ध्वजारोहण

उत्कृष्ट कार्यों के लिए रामदुलारी कुमारी और भारती डोंगरे सम्मानित 

रायपुर। शंकर नगर इलाके में भावना नगर स्थित साईं सिमरन सोसाइटी में गणतंत्र दिवस पर अध्यक्ष मुकुल वर्मा ने ध्वजारोहण किया। इस दौरान बेहतर काम के लिए रामदुलारी कुमारी, भारती डोंगरे, सुनीता सिंह, सोसाइटी के कर्मचारी राजू और कमला को सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में कुशाग्र, रीति टांक आदि बच्चों ने देशभक्ति गीतों की प्रस्तुति दी। इस मौके पर स्वर्ण सिंह चावला, संजय सिंह, भूपेंद्र परमार, विकास पाठक, प्रसाद कामाविसदार, उज्जवल चक्रवर्ती, चंद्रशेखर पांडेय, वायपीएस परिहार, ज्योति टांक, कविता त्रिपाठी, मौसमी रानी, माधुरी टांक आदि रहवासी मौजूद थे।

Tuesday, January 26, 2021

डायरी : हम आपस में मिलना-जुलना क्यों नहीं चाहते?

*हम लोग एक- दूसरे से बात क्यों नहीं करते?*

*हम आपस में मिलना-जुलना क्यों नहीं चाहते?* 

~~~*पत्रकार व ब्लॉगर रामकृष्ण डोंगरे* ~~~ 
---मेरी डायरी के पन्नों से---

जीवन में अगर हम लोगों से मिलेंगे नहीं, बात नहीं करेंगे तो हमारे इंसान होने का क्या मतलब. हम इंसान होने की वजह से एक दूसरे के साथ अपनी फीलिंग को शेयर कर सकते हैं। लेकिन आज के दौर में हम शेयर नहीं कर रहे हैं। 

एक वह दौर था, जब हम चिट्ठी लिखा करते थे. चिट्ठी के जरिए अपने विचारों को दूसरों तक पहुंचाया करते थे. फिर उनके उत्तर का इंतजार करते थे. ऐसे में अगर हमारी दोस्ती हो जाती थी तो हम उनसे मिलने के लिए कई किलोमीटर का फासला तय करते थे. मैं अपनी बात करूं तो मैंने अपने मोहल्ले, गांव या स्कूल के बाहर लोगों से दोस्ती के लिए पहला माध्यम आकाशवाणी यानी रेडियो को चुना. जब हम फरमाइशी प्रोग्राम में चिट्ठी लिखा करते थे तो वहां से हम नए मित्र तलाशते थे. जिनके नाम याद रह जाते थे। उन्हें बार बार याद करते थे। इसके अलावा कार्यक्रमों की प्रतिक्रिया के पत्र पहुंचते थे, और जब लोगों के विचार हमें अच्छे लगते थे, तो हम उनकी तरफ चिट्ठी लिखकर दोस्ती का हाथ बढ़ाते थे. कई चिट्ठियों तक सिलसिला चलने के बाद मिलने का समय आता था.

एक वाकया मुझे याद आता है। ऐसे ही एक रेडियो मित्र, पेन फ्रेंड से मिलने के लिए हमने जिला मुख्यालय छिंदवाड़ा से तामिया के पातालकोट का 60 किमी का सफर यूं ही तय कर लिया था। बिना किसी खास वजह के। पातालकोट पहुंचने के बाद हमें पता चला कि उस मित्र का घर जंगल वाले पैदल रास्ते में कई किलोमीटर दूर है। तो बड़ी मुश्किल से हमने उसका घर खोजा। मिलते ही हमारी सारी थकान दूर हो गई। मित्र ने तुरंत हमें गरमा गरम पकौड़े खिलाएं. 

… तो एक दौर वह था। और आज जब एक मोबाइल हमारे हाथ में है और हमें "कर लो दुनिया मुट्ठी में" कहकर यह मोबाइल थमाया गया है, वाकई पूरी दुनिया हमारी मुट्ठी में है. हम मात्र एक क्लिक से हमारे देश के राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री से लेकर किसी भी अपने परिचित या किसी भी क्षेत्र में सक्रिय या हमारे आदर्श व्यक्ति से हम मैसेज पर बातचीत कर सकते हैं। कॉल भी कर सकते हैं। लेकिन आज के दौर में देखा जा रहा है कि हम किसी से भी दिल से बातें नहीं करना चाहते। मिलना नहीं चाहते। अगर किसी को यूं ही फोन लगा लो तो उधर से तुरंत पूछा जाता है कि कोई काम था क्या। 

ऐसे में मिलने की और रिश्ता बनाने की बात क्या करें। 
ज्यादा दूर की बात ना कि जाए तो शहरी जिंदगी में अपार्टमेंट कल्चर में हम अपने पड़ोसियों से भी करीबी रिश्ता नहीं रख पाते। इसमें कहां कमी है। इस पर हमें विचार करना चाहिए। इसके अलावा अपने दोस्तों से और रिश्तेदारों से भी हमें गाहे-बगाहे बातचीत करते रहना चाहिए। साथ ही किसी ना किसी बहाने मिलना भी चाहिए। 


~~~*आपका दोस्त रामकृष्ण डोंगरे* ~~~
---मेरी डायरी के पन्नों से/26 जनवरी, 2021---

Wednesday, December 2, 2020

|| आकाशवाणी छिंदवाड़ा, रेडियो एनाउंसर गीतांजलि गीत और मैं ||

102.2 मेगाहर्ट्ज पर ये आकाशवाणी का छिंदवाड़ा केंद्र है… स्टूडियो की घड़ी में शाम के 5 बजकर 30 मिनट हो चुके हैं। आइए सुनते हैं आपका पसंदीदा कार्यक्रम...युववाणी। 

आज हम मुलाकात करते हैं एक ऐसी शख्सियत से जो बहुमुखी प्रतिभा संपन्न है। इनका नाम है गीतांजलि गीत। जी हां लेखिका, पत्रकार, कार्टूनिस्ट, कमेंटेटर और रेडियो एनाउंसर गीतांजलि गीत...। हम सभी श्रोताओं की तरफ से आपका स्वागत करते हैं।

…इस पोस्ट का अंदाज रेडियो वाला है। 

आप इशारा समझ ही गए होंगे... आज मैं मुलाकात करने पहुंचा हूं मशहूर रेडियो एनाउंसर गीतांजलि गीत मैडम से। दोपहर के 12:00 बजे है. तारीख 22 नवंबर 2020. स्थान है मिश्रा कॉलोनी, बरारीपुरा छिंदवाड़ा।

इस नए मकान में ये पहली मुलाकात है। यहां मौजूद हैं श्री राजेंद्र राही जी, वरिष्ठ पत्रकार और कवि। साथ में उनकी बिटिया गौरंगी मिश्रा।

मुलाकात में अलग-अलग टॉपिक पर चर्चा हुई, जिसमें पहला टॉपिक आकाशवाणी छिंदवाड़ा था। आकाशवाणी की चर्चा शुरू होते ही बतौर श्रोता मेरी पहली पहचान को गीतांजलि गीत मैडम ने याद किया। यहां कई कंपेयर और एनाउंसर के नामों की चर्चा भी निकली, जिनमें धीरेंद्र दुबे जी, प्रमोद डबली जी, नरेंद्र सकरवार जी, प्रशांत नेमा, इमरान खान, सारंग काले, शिवानी श्रीवास्तव आदि नाम प्रमुख थे। आकाशवाणी के वरिष्ठ एनाउंसर अवधेश तिवारी जी और डहेरिया सर, कमल सागरे आदि नामों पर भी चर्चा हुई।

कमल सागरे जी के कार्यकाल में मेरा (रामकृष्ण डोंगरे) का आकाशवाणी छिंदवाड़ा के कंपेयर और कुछ कुछ एनाउंसर में थोड़ा खौफ था. उसकी चर्चा मैं इस पोस्टर करना चाहूंगा। 

*युववाणी कार्यक्रम और सातसवाल*

आकाशवाणी छिंदवाड़ा का युववाणी प्रोग्राम और इसमें मेरा सबसे पसंदीदा कार्यक्रम सात सवाल मैं 1995 से लगातार सुन रहा था। इस प्रोग्राम में जनरल नॉलेज के 7 क्वेश्चन, 7 सवाल पूछे जाते थे, जिनके जवाब श्रोताओं को एक हफ्ते में लिखकर पोस्ट करना होता था। बाद में सही जवाब वाले श्रोताओं के नाम अनाउंस किए जाते थे। प्रथम, द्वितीय, तृतीय विजेताओं को आकाशवाणी की तरफ से इंटरव्यू के लिए आमंत्रित किया जाता था। इसी प्रोग्राम की बदौलत में दो बार इंटरव्यू में शामिल हुआ।

इसी प्रोग्राम में सवालों के गलत जवाब को सही बताने की वजह से मेरा आकाशवाणी छिंदवाड़ा से विवाद चलता था। कई बार टेलीफोन पर भी मेरी कमल सागरे सर और वहां के कई एनाउंसर कंपेयर से बात होती थी। बार-बार टोका टोकी से तंग आकर कमल सागरे जी ने टेलीफोन पर बातचीत में मुझसे यह तक कह दिया था कि --- 

"हमारे यहां जो एनाउंसर और कंपेयर काम करते हैं वे भी इसी दुनिया से है और आपके जैसे ही है। उनसे गलतियां हो रही है। हो जाती है तो मैं क्या करूं। तुम क्या चाहते हो कि मैं आकाशवाणी छिंदवाड़ा में एक ताला लगाकर स्टेशन बंद कर दूं।"

तब मैंने महसूस किया कि और ज्यादा टीका टिप्पणी करने का कोई फायदा नहीं है. सच्चाई से मैं भी वाकिफ था, सभी कंपेयर एनाउंसर अपनी व्यस्त लाइफ में से कुछ समय निकालकर वहां ड्यूटी करने जाते थे। और जनरल नॉलेज की जो भी किताब उनके हाथ में लगती थी, उसी से वे सवाल पूछते थे और जवाब चुनते थे। तो अगर उन किताबों में ही गलत जवाब लिखे हैं तो वे गलत जवाब को ही सही बता देते थे।

...लेकिन जैसा कि हम बचपन से सुनते आ रहे हैं न्यूज़पेपर और रेडियो उस जमाने में हर तरह की जानकारी का पुख्ता सोर्स होते थे। अगर पाठक या श्रोता, अखबार या रेडियो से गलत जानकारी प्राप्त करेगा तो उसका असर उसके फ्यूचर पर भी पड़ेगा। इसीलिए मैं गलत जवाब को बर्दाश्त नहीं कर पाता था। 

इस चर्चा में गीतांजलि गीत मैडम ने शिवानी श्रीवास्तव मैडम का खास जिक्र किया। गीतांजलि मैडम ने बताया कि शिवानी श्रीवास्तव मैडम आप को लेकर खौफ़जदा रहती थी। तब मैंने (गीतांजलि गीत) उन्हें बताया कि -- "वह अच्छा लड़का है. वह सिर्फ यही चाहता है कि रेडियो के जरिए गलत जानकारी प्रसारित ना हो."

लगभग 10 साल के बाद हो रही हमारी इस मुलाकात में गीतांजलि मैडम ने अपने अब तक के सफर का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि वे इंदौर के एफएम रेडियो ज्ञानवाणी में डायरेक्टर भी रही। इसके अलावा वहां उन्होंने कुछ समय कॉलेज में भी बच्चों को पढ़ाया। वही अलग-अलग सरकारी और प्राइवेट माध्यमों के लिए डॉक्यूमेंट्री और शार्ट वीडियो भी बनाए, जो काम अभी जारी है।

उनकी बिटिया गौरांगी भी उन्हीं की तरह प्रतिभाशाली है। वे पेंटिंग के अलावा स्केच भी बनाती है। जर्नलिज्म की स्टूडेंट है। शॉर्ट फिल्म भी बना चुकी है।

गीतांजलि गीत मैडम रेडियो की तरह बोलती है। क्योंकि वे रेडियो में काम जो करती है। उन्हें सुनना हमेशा अच्छा लगता है। उस दिन भी मैं उन्हें लगातार 1- 2 घंटे तक सुनता रहा। ये मुलाकात यादगार रही। रेडियो की दुनिया के लोग मेरे सबसे बड़े स्टार हुआ करते थे। एक समय मैं मुंबई जाने का ख्वाब देखता था, तो सबसे पहले (अमिताभ और शाहरुख से भी पहले) विविध भारती मुंबई जाकर कमल शर्मा जी और यूनुस खान जी जैसे तमाम वरिष्ठ एनाउंसर से मिलने का सपना देखता था। 

रेडियो सुनना वाकई अच्छा शौक है। यह बच्चों में कल्पना शक्ति को बढ़ाता है। आप काम करते हुए भी अपना मनोरंजन और ज्ञानवर्धन कर सकते हैं। मैं आज के तेज रफ्तार चलने वाले रेडियो चैनल के बारे में ये बात नहीं कहता। मगर जमाने के साथ बदलाव तो आना ही था। ये प्राइवेट एफएम चैनल भी युवाओं के बीच में खासे लोकप्रिय है। और इनके आरजे आज के युवाओं के स्टार भी है, जिनमें *रेडियो मिर्ची वाले आरजे नावेद* पूरे देश में सबसे ज्यादा मशहूर है, क्योंकि उनका प्रोग्राम "मिर्ची मुर्गा" खासा लोकप्रिय है. 

2003 में मैंने भी रेडियो में एनाउंसर कंपेयर के लिए फार्म भरा था, एग्जाम भी हुआ लेकिन अफसोस की बात यह रही कि मेरा सिलेक्शन नहीं हुआ शायद अच्छा ही हुआ। 

गीतांजलि गीत मैडम और आकाशवाणी के दूसरे वरिष्ठजनों, छिंदवाड़ा के डीडीसी कॉलेज, पीजी कॉलेज, गर्ल्स कॉलेज के तमाम प्रोफेसरों और लेखक और साहित्यकारों के मार्गदर्शन की वजह से ही मैं आज जीवन में कुछ कर पा रहा हूं। अगर इनका मार्गदर्शन नहीं मिलता तो मैं अपना यह सफर नहीं तय कर पाता।

...तो दोस्तों, फेसबुक की घड़ी में अभी वक्त हो रहा है शाम के 6 बजकर 27 मिनट और हम अपनी इस चर्चा को यहीं विराम देते हैं। अगली कड़ी में आपसे फिर रूबरू होंगे और मुलाकात करेंगे किसी नई शख्सियत से। तब तक के लिए अपने दोस्त और होस्ट रामकृष्ण डोंगरे को विदा कीजिए… 

शुभ रात्रि।

प्रस्तुति और संयोजन - रामकृष्ण डोंगरे

#मुलाकातों_के_सिलसिले_2020