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Wednesday, September 5, 2018

क्या आप भी कॉपी- पेस्ट-फारवर्ड खेलते हैं?

                                                                                                    
     *मैं भी कल गोल्ड मैडल लाया*
     *पर मीडिया वाले*
     *दिखा नहीं रहे*
     *सब बिके हुए हैं।*

          _ऐसे मैसेज, ऐसी इमेज के साथ वायरल किए जाते है। वायरल करने में साथ देने वाले अपने दिमाग़ का इस्तेमाल नहीं करते हैं। सोचने समझने की क्षमता वर्तमान पीढ़ी में बहुत ही कमज़ोर है। वे इसे मात्र हँसी का हँसगुल्ला समझते हैं। ऐसी वाहियात वायरल से किसका भला हो रहा है ! लाखों बार वायरल हो या हज़ारों बार, लेकिन प्रत्येक बार upload और download में हमारे अपने NET-pack में से Data-Loss होता है। हमारी अपनी आदतें ख़राब होती हैं। हमारी अपनी सोचने समझने की क्षमता शनै-शनै क्षीण होते जा रही है। कुछ समय शौक़ से व्हाट्सऐप पर गुज़ारने के बाद भी एक अजीब सी थकान महसूस होती है।_

          _क्यों अपना शौक़ पूरा करने के बाद भी तरोताज़ापन महसूस नहीं होता ! कभी सोचते विचारते नहीं हैं। बस कॉपी-पेस्ट के लिए मसाला खोजने विचरते हैं।_

          _कभी NET-pack से हुए अपने Data-Loss पर यह विचार नहीं करते कि इस वायरल से फ़ायदा किसे मिलता है ! कौन Profit कमा रहा है ! हमें बेवक़ूफ़ बनाकर कौन हमारा मज़ा ले रहा है !_

          _*और*_… _*बात तब भी समझ में नहीं आती है इनको जब बेवक़ूफ़ बनाने वाला डेढ़-श्याना अपनी वाहवाही के क़िस्से गढ़कर, शेयर मार्केट में रजिस्टर होकर, बैंकों से कर्ज़ लेकर, कर्ज़ की रक़म और निवेशकों की रक़म डकारकर विदेश भाग जाता है। इनकी रहनुमायी में, हमारे ही वोटों की बदौलत जीत हासिल किए इनके माई-बाप, हमारी ही छाती पर मूँग दलने नये-नवीनतम् कर-आरोपण के पैकेज लेकर आते हैं। नाम देते हैं इसे "देश उभार का"। टोटली इमोशनल ब्लैकमेलिंग। फिर भी हम ऐसे किस्सों को नमकीन बनाकर वायरल करते फिरते हैं। कॉपी-कॉपी पेस्ट-पेस्ट खेलते हैं।*_

          _धन्य हैं हम_, _जो कि हमारे गुरुओं से प्राप्त शिक्षा का सदुपयोग व्हाट्सऐप फेसबुक और इनके जैसी अन्य मुफ़्त सेवाओं पर कॉपी-पेस्ट-फ़ॉर्वर्ड का खेलते हुए अपनी बुध्दि विनशित (विनाश) कर रहे हैं।_

          _हम जैसे बेवक़ूफ़ों के लिए भी एक सरकारी तिथि, एक सरकारी छुट्टी घोषित होनी चाहिए।_

          _*Bewakoofz Day*_

          _फ़र्स्ट एप्रिल *fools day* है जो कि विदेशी है।_

          _हमारा अपना *स्वदेशी बेवक़ूफ़्ज़-डे* अलग बनना चाहिए।_

          *H*_appy_ *T*_eachers_ *D*_ay_… 🙏🏼
                                                                                                    


Thursday, April 5, 2018

सोशल मीडिया : नजर है आप पर

मित्रों, देखा जा रहा है कि वर्तमान में कई अनर्गल भड़काऊ मैसेज सोशल मीडिया, व्हॉट्सऐप आदि पर वायरल किए जा रहे हैं।

        यह ऐसे मैसेज यदि पर्सनल पर मिले तो सबसे पहले, पहला प्रश्न खुद से करें कि *"यह मेरे पास क्यों आया है ?"*

        और… यदि ग्रूप में आता है तो आपका प्रश्न खुद से यह होना चाहिए कि *"इसे ग्रूप में किसने और क्यों भेजा है ?"* भेजने वाले को आप कितना जानते पहचानते हैं, अनजान है तो उससे परिचय लेकर और जानकार है तो तब भी, इस अनर्गल भड़काऊ मैसेज का सोर्स source पूछते हुए पोस्ट करने का जायज कारण प्रेमपूर्वक पूछें।

       *विश्वास करिए, जब उपरोक्त विचार पर आपका ध्यान होगा, तत्सामयिक आकस्मिक उद्वेलन आपका शांत रहेगा अर्थात ऐसी ग़ुस्सा दिलाने वाली पोस्ट पढ़कर भी आपको ग़ुस्सा नहीं आएगा।*

        यह निम्न संकेत
```          🦅👁          ```
        हमेशा दिमाग़ में रखें कि कई राजनैतिक षड़यंत्रकारियों की *"गिद्ध नज़र"* आप पर बनी हुई है।

        वह ऐसे मैसेज जानबूझकर वायरल करवाना चाहते हैं और गिद्ध निगाह से विवेचना कर रहे हो सकते हैं कि कौनसे किन समाचारों से कितने बेवक़ूफ़ भड़क रहे हैं।

        आपको पता भी नहीं चलेगा, *आप बेवक़ूफ़ों की गिनती में गिने गये हैं।*

        आपको पता ही है कि अगले वर्ष *2019* में मतदान होने हैं। राजनीतिक षड़यंत्र किन्हीं घिनौने कृत्य को अंजाम देने की साज़िश की तैयारी जोरों पर हो रही हो सकती है।

        कई साज़िश-सहयोगियों को देश के बेवक़ूफ़ों की गिनती करने की ज़िम्मेदारी सौंपी गयी हो सकती है। यह सब भी शायद इसी के तहत हो रहा हो सकता है।

        एक औचित्यहीन मैसेज एक बार जारी होने के बाद, कितने लोगों द्वारा कितनी बार कॉपी/पेस्ट या फ़ॉर्वर्ड किए जाकर वायरल होता है और इसकी प्रतिक्रिया में कौन किस प्रकार की भाषा का इस्तेमाल करता है। यह सब देखने के लिए कई *गिद्ध निगाहें* ऐक्शन/रीएक्शन पर नज़र रख बेवक़ूफ़ों के आँकड़े तैयार कर रही हो सकती हैं।

        और उनके आला अफ़सरान, साज़िश रचयिता संगठन अपनी तैयारियों का आँकलन कर रहे हो सकते हैं।

        *अपनी और अपनों की सुरक्षा हमारी निजी ज़िम्मेदारी भी है। यदि मेरे तर्क में कोई सच्चाई महसूस हो तो संकेत*
```          "🦅👁"          ```
*याद कर लें और उद्वेलित करने, भड़काने, ग़ुस्सा दिलाने आदि वाले सभी प्राप्त गुस्ताख़ मैसेज को तुरंत ही डिलीट कर दें और अपनी तरफ़ से कोई प्रतिक्रिया नहीं दें। प्रारंभिक पैराओं में दिए खुद से पूछने वाले प्रश्न भी ध्यान में रखेंगे तो तुरंत ग़ुस्सा भी नहीं आएगा।*

        है न दोहरा फ़ायदा :-```
  1. ``` ग़ुस्से पर कंट्रोल```
  2. ``` बेवक़ूफ़ों की गिनती में शामिलता से बचाव

        सहमत हैं तो अपने अपनों को जागरूक करने यह शेयर कर सकते हैं```।

```
(लेखक रमेश बालानी पुराना राजेंद्र नगर, रायपुर में रहते हैं। और सोशल मीडिया पर पैनी नजर रखते हुए लोगों को जागरूक करने के लिए पोस्ट लिखते हैं।)