Tuesday, June 9, 2015

कुठियाला हटाओ, माखनलाल बचाओ : दूसरी किस्त

#लड़ाईजारीहै #savemcu #savejournalism
रेडियो एफएम आकाशवाणी छिंदवाड़ा ने मेरे अंदर जुनून पैदा किया। मीडिया में आने के लिए  प्रेरित किया। उन दिनों मैं हिंदी लिटरेचर से एमए प्रिवियस की पढ़ाई कर रहा था। साल था 2003 अचानक एक मित्र माखनलाल (एमसीयूजा पहुंचा। इधर मैं पत्रकारिता के पेशे से जुड़ता चला   गया। कॉलेज फंक्शन की खबरें बनाना और अखबारों में देना। फिर अनियमित रूप से लोकमत   समाचार से जुड़ गया। 
कई खबरें पब्लिश हुई और पत्रकार बनने की दिशा में आगे बढ़ गया एमए कम्पलीट होते ही 5 जुलाई, 2004 को भोपाल जा पहुंचा। पढ़ाई… पढ़ाई और लगातार पढ़ाई के बाद फिर तुरंत एडमिशन लेने का कोई इरादा नहीं था। सो स्वदेश न्यूजपेपर में नौकरी शुरू की। जॉब के दौरान कई लोगों से मिलना जुलना हुआ। 

आखिर कुछ शुभचिंतकों की सलाह पर साल 2005 में माखनलाल चतुर्वेदी विवि में एडमिशन ले लिया।उससे पहले भी कई पुराने पत्रकारों ने हमसे कहाभैया पत्रकार क्यों बनना चाहते होकुछ और कर लो। पढ़े-लिखे हो। लेकिन हम नहीं मानेक्योंकि हमें तो पत्रकार ही बनना था।

माखनलाल में एडमिशन लेने के बाद यहां के माहौल का पता चला। भोपाल शहर में यहांवहां कई बिल्डिंगों में बिखरें कमरों में लगने वाले डिपार्टमेंट और इनमें पढ़ने वाले स्टूडेंट्स ही पूरी माखनलाल यूनिवर्सिटी थी। 
एक बार का वाकया है मुझे किसी काम से -8 त्रिलंगाअरेरा कॉलोनी में यूनिवर्सिटी में जाना था। मिनी बस से उतरते ही मैंने लोगों से माखनलाल विवि का एडरेस पूछा। काफी मशक्कत करने के बाद ही मुझे विवि की बिल्डिंग का रास्ता मिला। मतलब साफ है कि आम लोग विवि की बिल्डिंग को नहीं उन कुछ कमरों में चलने वाले डिपार्टमेंट और उन काबिल स्टूडेंट्स के सहारे विवि को जानते थे आज भी कुछ नहीं बदला है। किसी कॉलेज और यूनिवर्सिटी की पढ़ाईवहां का माहौल और वहां से पढ़े बच्चों की काबिलियत ही सबसे ज्यादा मायने रखता है।

... जारी (अगली किस्त में)

कुठियाला हटाओ, माखनलाल बचाओ : पहली किस्त

#savemcu #savejournalism #लड़ाईजारीहै
पुष्प की अभिलाषा… चाह नहींमैं सुरबाला के गहनों में गूंथा जाऊं… राष्ट्रकवि माखनलाल चतुर्वेदी… और माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विवि भोपाल… दोस्तोंआपको याद तोहोगा ही… चलिए फिर से याद करते हैं। इस बार मौका हैसेव एमसीयूसेव जर्नलिज्म, लड़ाईजारी है के साथ
यहां के कुछ मौजूदा और पुराने छात्रों ने कई मुद्दों को लेकर सोशल मीडिया पर विवि केकुलपति बीके कुठियाला के खिलाफ मुहिम शुरू की है। छात्रों से जुड़े मद्दे है जैसेइंटर्नशिप,प्लेसमेंटलाइब्रेरीकंप्यूटर लैब की टाइमिंगसीनियर प्राध्यापकों की अवहेलना और कम योग्यप्राध्यापकों को प्रश्रय देना। इसके साथ ही कुलपति की गलत नीतियां। लड़ाई किसी व्यक्ति केखिलाफ नहीं उस व्यक्ति के तालिबानी फरमानों के खिलाफ चल रही हैं।

छात्रों का आंदोलन जोर पकड़ रहा है। छात्रों की द्वारा बनाए फेसबुक पेज पर अब तक 1200 सेज्यादा लोग जुड़ चुके हैं। यह आंदोलन इसी विवि में साल 2001 में महीनेभर तक चले एक औरआंदोलन की याद दिला रहा है। उस वक्त भी छात्रों ने इंटर्नशिपछात्रों की फीस के मुद्दे पर लगातारआंदोलन चलाया था। आखिरकार विवि प्रशासन को छात्रों की सभी मांगों को मानना पड़ा था। 

मतलब साफ है कि छात्रों की जायज मांगों के सामने विवि प्रशासन को झुकना पड़ा था 

और इस बार भी झुकना पड़ेगा।

... जारी (अगली किस्त में)